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गुरुवार, 4 जून 2026

आलेख : दिल्ली-एनसीआर में अग्निकांड-हादसे, हिदायतें और हकीकत

  • करोल बाग से मालवीय नगर तक, हर त्रासदी ने उठाए एक जैसे सवाल

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे जुड़े नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम तथा फरीदाबाद जैसे शहर देश के सबसे तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में शामिल हैं। ऊँची-ऊँची इमारतें, व्यावसायिक परिसर, औद्योगिक इकाइयाँ और विशाल बाजार विकास की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही अग्नि सुरक्षा की चुनौतियाँ भी तेजी से बढ़ी हैं। पिछले एक दशक में हुए अनेक बड़े अग्निकांडों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहरी विस्तार की गति के मुकाबले सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कमजोर कड़ी बनी हुई है। दिल्ली में वर्ष 2018 के बवाना पटाखा फैक्टरी अग्निकांड से लेकर 2019 के करोल बाग होटल अग्निकांड, अनाज मंडी फैक्टरी त्रासदी, 2022 के मुंडका अग्निकांड और हाल ही में 2026 के मालवीय नगर होटल-रेस्तरां अग्निकांड तक, लगभग हर बड़ी घटना ने एक ही कहानी दोहराई है, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध निर्माण, विद्युत शॉर्ट-सर्किट और आपातकालीन निकास व्यवस्था का अभाव।


हादसों का सिलसिला

फरवरी 2019 में करोल बाग स्थित होटल अर्पित पैलेस में लगी आग में 17 लोगों की मौत हुई। जांच में सामने आया कि भवन में कई सुरक्षा खामियाँ थीं। आपातकालीन निकास व्यवस्था अपर्याप्त थी, ज्वलनशील सामग्री का उपयोग किया गया था और सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया था। इसी वर्ष दिसंबर में पुरानी दिल्ली के अनाज मंडी क्षेत्र में लगी आग ने पूरे देश को झकझोर दिया। एक अवैध फैक्टरी में सो रहे मजदूर धुएँ और आग के बीच फँस गए। 43 लोगों की मौत हुई। संकरी गलियाँ, बंद निकास मार्ग, लोहे की जालियाँ और सुरक्षा उपकरणों का अभाव इस त्रासदी को और घातक बना गया। प्रारम्भिक जांच में विद्युत शॉर्ट-सर्किट की आशंका जताई गई। मई 2022 में पश्चिमी दिल्ली के मुंडका स्थित एक व्यावसायिक भवन में आग लगने से 27 लोगों की जान चली गई। भवन के पास अग्निशमन विभाग की मंजूरी नहीं थी, पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपकरण नहीं थे और केवल एक सीढ़ी होने के कारण लोग सुरक्षित बाहर नहीं निकल सके। और अब जून 2026 में मालवीय नगर स्थित होटल-रेस्तरां परिसर में लगी भीषण आग ने एक बार फिर राजधानी को शोक में डुबो दिया। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगानी पड़ी। प्रारम्भिक जांच में आग के रेस्तरां क्षेत्र से शुरू होने की आशंका जताई गई है। घटना के बाद दिल्ली सरकार ने अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ विशेष अभियान की घोषणा की।


केवल दिल्ली नहीं, पूरा एनसीआर जोखिम में

आग की समस्या केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम की हाईराइज सोसायटियों में भी पिछले कुछ वर्षों में आग की अनेक घटनाएँ सामने आई हैं। अधिकांश मामलों में जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन इन घटनाओं ने यह संकेत दिया कि बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था अभी भी पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि एनसीआर में तेजी से बढ़ती हाईराइज इमारतें नई चुनौती बन चुकी हैं। कई भवनों में स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म और हाइड्रेंट लगाए तो गए हैं, लेकिन उनके रखरखाव की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई बार आपातकालीन निकास मार्ग भी अवरुद्ध पाए जाते हैं।


आखिर क्यों लगती हैं इतनी आग?

दिल्ली अग्निशमन सेवा और विभिन्न जांच रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश बड़ी आग की घटनाओं के पीछे विद्युत शॉर्ट-सर्किट प्रमुख कारण रहा है। पुराने तार, ओवरलोडिंग, अवैध बिजली कनेक्शन और बढ़ती बिजली खपत जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके अलावा ज्वलनशील सामग्री का असुरक्षित भंडरण, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी आग को विकराल रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञ आर.सी. शर्मा कहते हैं, “आग से होने वाली अधिकांश मौतें लपटों से नहीं, बल्कि धुएँ और दम घुटने से होती हैं। यदि भवनों में सुरक्षित निकास मार्ग और कार्यशील अलार्म सिस्टम हों तो बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं।” शहरी नियोजन विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ता का मानना है कि फायर एनओसी प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार प्रत्येक व्यावसायिक और बहुमंजिला भवन का नियमित सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।


सरकारी प्रयास

बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए दिल्ली सरकार और आसपास के राज्यों ने कई कदम उठाए हैं। अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण, नए दमकल वाहनों की खरीद, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और विशेष बचाव उपकरणों की उपलब्धता पर जोर दिया गया है। बड़े हादसों के बाद विशेष निरीक्षण अभियान भी चलाए गए हैं। मुंडका हादसे के बाद व्यापक जांच और निरीक्षण अभियान शुरू किए गए थे, जबकि मालवीय नगर हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने सुरक्षा नियमों के उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है। हालाँकि विशेषज्ञ मानते हैं कि संसाधनों की उपलब्धता से अधिक महत्वपूर्ण उनका प्रभावी उपयोग है। यदि निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होगी तो दुर्घटनाएँ रुकना कठिन है।


कहाँ रह जाती हैं कमियाँ?

सबसे बड़ी समस्या अनुपालन की है। भवन निर्माण के समय नियमों का पालन कर लिया जाता है, लेकिन बाद में रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता। कई इमारतों में अग्निशमन उपकरण वर्षों तक परीक्षण के बिना पड़े रहते हैं। पुरानी दिल्ली, सदर बाजार, गांधी नगर, खारी बावली और अनेक औद्योगिक क्षेत्रों की संकरी गलियाँ दमकल वाहनों की पहुँच को प्रभावित करती हैं। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. अजय मेहता कहते हैं, “भारत में अक्सर हादसे के बाद कार्रवाई होती है। जरूरत यह है कि जोखिमों की पहचान पहले की जाए और उन्हें कम करने के उपाय समय रहते लागू किए जाएँ।”


दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख अग्निकांड

वर्ष                      स्थान                      जनहानि

2019         करोल बाग होटल, दिल्ली       17 मृत

2019         अनाज मंडी फैक्टरी, दिल्ली      43 मृत

2022       मुंडका व्यावसायिक भवन, दिल्ली  27 मृत

2024 पूर्वी दिल्ली शिशु अस्पताल अग्निकांड    6 नवजातों की मृत्यु

2026    मालवीय नगर होटल-रेस्तरां अग्निकांड   21 मृत

2024-26 नोएडा-गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटियों में कई बड़ी आग, भारी संपत्ति नुकसान।


आगे का रास्ता

विशेषज्ञों के अनुसार सभी व्यावसायिक और बहुमंजिला भवनों का वार्षिक फायर ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। विद्युत प्रणाली की नियमित जाँच, मॉक ड्रिल, अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण और अवैध निर्माणों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई समय की आवश्यकता है। साथ ही नागरिकों को भी यह समझना होगा कि अग्नि सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक दायित्व है। दिल्ली-एनसीआर के अग्निकांड केवल दुर्घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि हमारी शहरी व्यवस्था की कमजोरियों का आईना हैं। करोल बाग, अनाज मंडी, मुंडका और मालवीय नगर जैसी त्रासदियाँ अलग-अलग घटनाएँ जरूर हैं, लेकिन इनके कारण लगभग समान हैं। यदि सुरक्षा मानकों का कठोरता से पालन नहीं किया गया और निगरानी व्यवस्था को मजबूत नहीं बनाया गया तो विकास की यह चमक भविष्य में और बड़े हादसों की कीमत पर हासिल होती दिखाई दे सकती है। आग लगने के बाद राहत पहुँचाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है आग लगने की नौबत ही न आने देना।




 

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डाॅ. चेतन आनंद

(कवि एवं पत्रकार)

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