- ईरान-अमेरिका तनाव से उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों के बीच कानपुर निवासी आशुतोष यादव ने प्रधानमंत्री को लिखा भावनात्मक पत्र
पत्र में आशुतोष यादव ने उल्लेख किया कि उनके परिवार ने यह निर्णय लिया है कि वे केवल आवश्यक वस्तुओं का ही उपयोग करेंगे और अनावश्यक खरीदारी तथा फिजूलखर्ची से बचेंगे। उनका मानना है कि यदि देश के करोड़ों परिवार ऐसा संकल्प लें तो विदेशी मुद्रा के अनावश्यक व्यय को रोका जा सकता है और संकट की घड़ी में राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रहित में किया गया छोटा-सा त्याग भी भविष्य में बड़ी शक्ति का आधार बन सकता है। पत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर व्यक्त की गई चिंता से जुड़ा है। आशुतोष यादव ने समाचारों के हवाले से यह उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और काफिले के आकार को सीमित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की सादगी, मितव्ययिता और जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि देश के करोड़ों नागरिक उनकी सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का जोखिम स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री केवल सरकार के मुखिया नहीं हैं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की आशाओं, आकांक्षाओं और विश्वास के केंद्र हैं। ऐसे समय में जब विश्व अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, भारत को एक मजबूत और स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है। इसलिए उनकी सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। पत्र में आग्रह किया गया है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए ताकि राष्ट्र निश्चिंत होकर उनके नेतृत्व में आगे बढ़ सके।
आशुतोष यादव ने अपने पत्र में कोविड-19 महामारी के कठिन दौर का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि महामारी के समय देश ने अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया, लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्र ने आत्मविश्वास बनाए रखा। वैक्सीन अभियान, गरीबों के लिए राहत योजनाएं और संकट प्रबंधन जैसे प्रयासों ने लोगों के भीतर आशा का संचार किया। उन्होंने इसे भारत की सामूहिक शक्ति और नेतृत्व क्षमता का उदाहरण बताया। पत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी जिक्र किया गया है। आशुतोष यादव ने लिखा कि आज भारत विश्व मंच पर एक प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित हो रहा है। आर्थिक, सामरिक, वैज्ञानिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। ऐसे में वर्तमान वैश्विक संकट भी भारत की प्रगति को रोक नहीं पाएगा, बल्कि देश और अधिक आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनकर उभरेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि परिस्थितियां कठिन भी होती हैं तो देशवासी अभावों और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन भारत की संप्रभुता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं होने देंगे। उन्होंने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश इस संकल्प को अवश्य साकार करेगा। पत्र के अंत में आशुतोष यादव ने अपनी दादी श्रीमती कृष्णा देवी, माता-पिता श्री श्याम सिंह और श्रीमती पुष्पा यादव की ओर से प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने अपने दिवंगत अनुज स्वर्गीय अभिषेक यादव को भी श्रद्धापूर्वक याद किया, जो प्रधानमंत्री को अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर राष्ट्रसेवा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए देश की उन्नति और समृद्धि की कामना की।

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