- शिव की शरण में आने वाला कभी निराश नहीं लौटता, महादेव हर भक्त का कल्याण करते हैं : अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा
सुख-सुविधाओं के बीच मानसिक तनाव और अस्थिरता से जूझ रहा
आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के बीच मानसिक तनाव और अस्थिरता से जूझ रहा है। ऐसे समय में भगवान शिव की भक्ति व्यक्ति को धैर्य, संयम और आत्मबल प्रदान करती है। शिव की आराधना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। भगवान शिव का जीवन त्याग, तपस्या, करुणा और लोककल्याण का संदेश देता है। उन्होंने समुद्र मंथन से निकले विष को स्वयं ग्रहण कर संसार की रक्षा की। यह हमें सिखाता है कि समाज और मानवता के हित में त्याग और सेवा का भाव रखना ही सच्ची शिव भक्ति है। शिवलिंग का जलाभिषेक करने तथा जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहां शिव का स्मरण होता है, वहां भय नहीं, बल्कि विश्वास और कल्याण का वास होता है। विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का पूजन-अभिषेक कर परिवार, समाज और विश्व के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। प्रतिदिन धाम पर 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निशुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की जाती है। सोमवार को भी करीब 10 क्विंटल से अधिक खिचड़ी और भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।

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