परामर्श में कहा गया है, ‘‘नागरिकों को सलाह दी जाती है कि जब तक पूरी यात्रा के लिए सभी आवश्यक यात्रा दस्तावेज प्राप्त न हों, तब तक वे भारत से अपनी यात्रा शुरू न करें।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘तीर्थयात्रियों को यह सत्यापित करने की भी सलाह दी जाती है कि उनका टूर ऑपरेटर विधिवत पंजीकृत और अधिकृत है।’’ अप्रैल में, विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून से अगस्त तक दो मार्गों - उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम में नाथू ला के माध्यम से आयोजित होने वाली है। भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत यह यात्रा पिछले साल लगभग पांच साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुई। यात्रा को शुरू में 2020 में कोविड महामारी के कारण और बाद में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध के कारण निलंबित कर दिया गया था।
नई दिल्ली । विदेश मंत्रालय ने निजी टूर ऑपरेटर के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मंत्रालय ने साथ ही, यात्रियों से कहा है कि वे यात्रा पर जाने से पहले सुनिश्चित कर लें कि उनका टूर ऑपरेटर पंजीकृत और अधिकृत है। विदेश मंत्रालय ने एक परामर्श में कहा, ‘‘मंत्रालय को ऐसे कई भारतीय नागरिकों से सहायता के लिये अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जो निजी टूर ऑपरेटर के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे, लेकिन चीन में प्रवेश के वास्ते आवश्यक वीजा और परमिट नहीं होने के कारण नेपाल में फंस गए हैं।’’ शनिवार देर रात जारी यह परामर्श उन भारतीय नागरिकों के लिए है, जो निजी टूर ऑपरेटर के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे हैं।

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