उन्होंने कहा कि सरकार आपराधिक न्याय प्रणाली में देरी को रोकने के लिए “प्रतिबद्ध” है। देशभर के पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए मंत्री ने उनसे समय पर आरोप-पत्र दाखिल करने, अभियोजन के साथ समन्वय बनाए रखने तथा अदालतों में मामलों की प्रभावी पैरवी करने को कहा, ताकि समय पर निर्णय सुनिश्चित किए जा सकें। शाह ने कहा कि जानकारी या डेटा को ‘इंटेलिजेंस’ सूचना में बदलना महत्वपूर्ण है और उन्होंने महाभारत का उदाहरण दिया, जहां भगवान कृष्ण ने यह भूमिका निभाई और संख्या में अधिक कौरवों के विरुद्ध पांडवों की जीत सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि अपराध स्थलों से एकत्र किए गए सभी डेटा का विश्लेषण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग उपकरणों की मदद से किया जाना चाहिए, ताकि अपराध के तरीके का पता लगाया जा सके, जिससे न केवल अपराधों को रोका जा सके बल्कि अपराधियों को भी तेजी से पकड़ा जा सके। शाह ने कहा कि न केवल राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) का उपयोग अपराधियों की पहचान के लिए किया जाना चाहिए, बल्कि अपराध स्थलों से एकत्र किए गए फिंगरप्रिंट जोड़कर इसके डेटाबेस को और समृद्ध भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे कई मामले हैं, जहां एनएएफआईएस ने सबसे जटिल मामलों को भी सरल बनाने में बहुत मदद की है। लेकिन, मेरा अभी भी मानना है कि एनएएफआईएस का इस्तेमाल केवल 10 प्रतिशत ही किया जा रहा है।’’ शाह ने कहा, ‘‘एनएएफआईएस का इस्तेमाल केवल अपराधियों को खोजने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह तभी सफल हो सकता है, जब आप हर अपराध स्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट के माध्यम से एनएएफआईएस के डेटा को समृद्ध करें।’’ शाह ने कहा कि यह दो-तरफा प्रणाली है जो अपराधी की पहचान करने में बहुत उपयोगी है, लेकिन अपराध तभी साबित हो सकता है, जब डेटा तैयार किया जाए। उन्होंने कहा, ‘‘जब आपराधिक न्याय प्रणाली की बात आती है, तो हमारा देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
पहले के समय में, पुलिस थाने को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का एक जरिया माना जाता था। यदि कहीं कोई विवाद होता था, तो थाना प्रभारी (एसएचओ) मामले का निपटारा कर देता था; अन्यथा मामला अदालत में चला जाता था और मामले वर्षों तक लंबित पड़े रहते थे।’’ उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आपराधिक न्याय प्रणाली को देश के हर नागरिक के लिए संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को प्राप्त करने का एक उपयुक्त माध्यम बनाया जाये। शाह ने नये आपराधिक कानूनों के तहत उपलब्ध उपकरणों के उपयोग के लिए प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि आरोप-पत्र में केवल वही आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, जो किसी अपराधी की भूमिका की पुष्टि करते हों। उन्होंने कहा, ‘‘फिंगरप्रिंट मिलान की पुष्टि हो गई, फोन रिकॉर्ड का मिलान भी हो गया, आंखों और डीएनए का मिलान भी हो गया और फिर आप 250 साक्ष्यों के साथ अदालत में जाते हैं। तो फिर प्रौद्योगिकी का क्या फायदा है?’’ शाह ने कहा कि अनुभवी सरकारी अभियोजकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर तैयार करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमें जांच, अभियोजन और दोषसिद्धि की पूरी प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी के सक्रिय इस्तेमाल के लिए बहुत बेहतर ढंग से काम करना होगा।’’

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