- संपत्ति विवाद में की थी निर्मम हत्या, शव पर नमक डालकर मिटाने की कोशिश की थी पहचान
- ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत वाराणसी पुलिस की प्रभावी पैरवी रंग लाई
पत्नी को मारकर आंगन में ही दफना दिया था
अभियोजन के अनुसार, वादी रामविलास हरिजन निवासी भिटारी ने थाना लोहता में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में बताया था कि 28 दिसंबर 2020 को वह और उसका भाई अमर अपने-अपने कार्य पर गए थे। दोपहर में घर लौटने पर उनकी मां आशा देवी घर पर नहीं मिलीं। पूछने पर पिता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वह सुनार की दुकान पर गई हैं और जल्द लौट आएंगी। शाम तक मां के वापस न आने पर दोनों पुत्रों को संदेह हुआ। इस दौरान उन्होंने देखा कि उनके पिता आंगन में फरसे से मिट्टी समतल कर रहे थे। जब दोनों भाइयों ने कमरे के भीतर जाकर देखा तो वहां खून के छींटे पड़े थे। संदेह गहराने पर उन्होंने उस स्थान की खुदाई की, जहां मिट्टी समतल की जा रही थी। खुदाई में उनकी मां आशा देवी का शव बरामद हुआ, जिसे हत्या के बाद जमीन में दफना दिया गया था। शव को जल्द गलाने के उद्देश्य से उसके ऊपर नमक भी डाला गया था। अभियोजन के मुताबिक, पुत्रों के पूछने पर राजेंद्र प्रसाद ने स्वयं स्वीकार किया था कि वह पत्नी से संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बना रहा था। विरोध करने पर उसने उसकी हत्या कर शव को आंगन में दफना दिया। इसके बाद वह मौके से फरार हो गया था।
तीन दिन बाद हुई गिरफ्तारी
घटना की सूचना मिलने पर थाना लोहता पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटना के तीन दिन बाद अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया। विवेचना के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार दिया।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मिली सफलता
प्रदेश सरकार द्वारा संचालित "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान के अंतर्गत पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देशन में कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस लगातार गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों की मॉनिटरिंग कर रही है। इसी क्रम में इस मामले की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की गई। अभियोजन की ओर से रोहित मौर्य (एडीजीसी क्रिमिनल) तथा अधिवक्ता सुधांशु गुप्ता ने न्यायालय में सशक्त पक्ष रखा। वहीं विवेचना एवं साक्ष्य संकलन में पुलिस अधिकारियों और अभियोजन टीम की समन्वित भूमिका रही, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने अभियुक्त को कठोर दंड सुनाया।

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