- सुरक्षित आहार से ही स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव-संस्कार मंच प्रभारी मनोज दीक्षित मामा
मंच के सह प्रभारी श्री माहेश्वरी ने कहाकि सुरक्षित और पौष्टिक आहार ही एक स्वस्थ, सक्षम और समृद्ध समाज की नींव है, यह केवल बीमारियों से बचाता ही नहीं है, बल्कि देश के भविष्य और मानव पूंजी के विकास में भी सबसे बड़ी भूमिका निभाता हैरासायनिक खाद और कीटनाशकों के बजाय जैविक और प्राकृतिक कृषि को अपनाने से भोजन की गुणवत्ता और भूमि की उर्वरता सुरक्षित रहती है। मानव जीवन की आधारशिला भोजन है, पर भोजन तभी जीवनदायी बनता है जब वह सुरक्षित, स्वच्छ और पोषणयुक्त हो। अन्न केवल शरीर की भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति, स्वास्थ्य और मानव अस्तित्व का मूलाधार है। यदि भोजन ही रोगों का वाहक बन जाए, तो वह अमृत के स्थान पर विष का कार्य करने लगता है। आज वैश्वीकरण, तीव्र शहरीकरण, बदलती जीवन शैली और जटिल होती खाद्य आपूर्ति प्रणालियों के युग में खाद्य सुरक्षा केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। इक्कीसवीं शताब्दी में जब विश्व अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रगति, वैश्वीकरण और तकनीकी क्रांति के युग में प्रवेश कर चुका है, तब खाद्य सुरक्षा का प्रश्न पहले से कहीं अधिक जटिल और महत्वपूर्ण बन गया है।
अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन
यहां पर मौजूद वक्ताओं ने कहाकि यह दिन सुरक्षित खाद्य प्रथाओं की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है, और हमें याद दिलाता है कि खाद्य जनित बीमारियां हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। सच्चाई यह है कि इनमें से कई बीमारियों को भोजन के उचित प्रबंधन और भंडारण के माध्यम से रोका जा सकता है। खाद्य सुरक्षा का मूल आधार जैविक, रासायनिक या भौतिक किसी भी प्रकार के खतरों को रोकना है। ये खतरे खेत से लेकर थाली तक हमारे भोजन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करके, यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके प्रयासों से प्राप्त पोषण शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे।

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