दिल्ली : UPSC भर्ती परीक्षाओं की मेधा सूची और सफल उम्मीदवारों के अंक स्वत: सार्वजनिक करे : CIC - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 16 जून 2026

दिल्ली : UPSC भर्ती परीक्षाओं की मेधा सूची और सफल उम्मीदवारों के अंक स्वत: सार्वजनिक करे : CIC

Disclose-upsc-marksheet
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भर्ती परीक्षाओं में चयनित उम्मीदवारों की श्रेणी-वार मेधा सूची, अंक और नाम सक्रिय रूप से सार्वजनिक करने की सलाह दी है। आयोग का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने ये निर्देश एक अभ्यर्थी की अपील पर जारी किये। अभ्यर्थी ने दिल्ली सरकार के योजना विभाग में उप निदेशक (योजना/सांख्यिकी) के पद के लिए हुए साक्षात्कार में उसे मिले अंक और प्रतीक्षा सूची की जानकारी मांगी थी।


सूचना आयुक्त जया वर्मा सिन्हा ने अपील पर दिये अपने फैसले में कहा कि ‘‘नियुक्ति/भर्ती के मामले में पारदर्शिता की ज्यादा आवश्यकता है’’ और सूचना के अधिकार (आरटीआई)अधिनियम की धारा 25(5) के तहत संघ लोक सेवा आयोग को सलाह दी जाती है कि वह भर्ती प्रक्रिया के सभी चरणों से जुड़ी जरूरी जानकारी सार्वजनिक करे। सीआईसी ने सिफारिश की कि यूपीएससी अपनी वेबसाइट पर ‘‘चयनित उम्मीदवारों के नाम, श्रेणीवार मेधा सूची (जिसमें सबसे पहले अनारक्षित श्रेणी और उसके बाद सभी आरक्षित श्रेणी अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति(एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दिव्यांग के अभ्यर्थियों के नाम और उनके अंक हों) और मौजूदा या बैकलॉग भर्ती के आधार पर पदों को भरने का क्रम सार्वजनिक करे, ताकि नागरिकों को जानकारी पाने के लिए आरटीआई अधिनियम का कम से कम सहारा लेना पड़े’’।  सीआईसी ने आरटीआई के तहत किये गए आवेदन के गलत जवाब के लिए यूपीएससी की खिंचाई की। शुरुआत में अपील करने वाले को उसके साक्षात्कार में मिले अंक की जानकारी देने से इनकार दिया गया था, क्योंकि अधिकारियों ने गलती से उसके अनुरोध को एक ऐसे दूसरे अभ्यर्थी से जोड़ दिया था, जो किसी लंबित कानूनी मामले में शामिल था। आदेश में कहा गया है, ‘‘आयोग आरटीआई अधिनियम के तहत जवाब देते समय इतनी बड़ी गलतियां करने के लिए संबंधित लोक प्राधिकारी को फटकार लगाता है।’’ सीआईसी ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(डी) के तहत प्रतीक्षा सूची नहीं देने के मामले में व्यवस्था दी कि कानून के तहत ‘गोपनीय’ शब्द अपने आप में छूट का आधार नहीं है। आयोग ने फैसले में कहा कि अधिकारी केवल जानकारी को ‘गोपनीय’ बताकर उसे देने से इनकार नहीं कर सकते, बल्कि उन्हें यह साबित करना होगा कि जानकारी का खुलासा करने से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति को कैसे नुकसान पहुंचेगा।

कोई टिप्पणी नहीं: