सीहोर : गुप्त नवरात्र का समापन, कन्या भोज के साथ हवन, पूजन और पूर्णाहुति - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 23 जुलाई 2026

सीहोर : गुप्त नवरात्र का समापन, कन्या भोज के साथ हवन, पूजन और पूर्णाहुति

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सीहोर। गुरुवार को आषाढ मास की नवमी पर नवरात्रि का समापन किया गया। इस मौके पर  प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी शहर के विश्रामघाट मां चौसट योगिनी मरीह माता मंदिर में गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया  जा रहा है। नवरात्रि के पावन अवसर के अंतिम दिवस यहां पर कन्या भोज के साथ हवन, पूजन और पूर्णाहुति की गई। इस मौके पर मंदिर के व्यवस्थापक गोविन्द मेवाड़ा, रोहित मेवाड़ा, संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, आयुष गुप्ता सहित अन्य ने यहां पर मौजूद कन्याओं का पूजन किण। सुबह नवमी पर मां सिद्धी दात्री की पूजा अर्चना के लिए मंदिर परिसर में दिनभर माता के दर्शनों कर पूजा-अर्चना की गई। गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन सुबह सामूहिक रूप से पूर्णाहुति दी। भड़ली नवमी आषाढ़ माह की नवरात्रि का आखिरी दिन होता है। इस तिथि पर देवी दुर्गा के जगदंबा स्वरूप की पूजा करने का विधान है। इसके साथ ही देवी की पूजा दश महाविद्याओं के रूप में भी की जाती है, चूंकि यह नवरात्रि का आखिरी दिन है, इसलिए इस दिन कन्या भोजन का भी आयोजन किया जाता है। जिला संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था। मां सिद्धिदात्री की अनुकंपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाएं, मां दुर्गा के नौ रूपों में यह रूप अत्यंत ही शक्तिशाली रूप है। कहा जाता है कि, मां दुर्गा का यह रूप सभी देवी-देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है। कथा में वर्णन है कि जब दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब वहां मौजूद सभी देवतागण से एक तेज उत्पन्न हुआ और उसी तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा जाता है।

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