- जगदीश मंदिर परमार क्षत्रिय समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में निकला ऐतिहासिक चल समारोह, मार्गभर पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
- प्रमुख मार्गों पर लगभग तीन घंटे तक यातायात प्रभावित रहा
रथ यात्रा का शुभारंभ प्रात:काल जगदीश मंदिर, छावनी में भगवान की महाआरती एवं विशेष पूजन के साथ हुआ। इसके बाद सुसज्जित रथ यात्रा नमक चौराहा, बड़ा बाजार, कोतवाली चौराहा, आनंद डेयरी चौराहा सहित विभिन्न प्रमुख मार्गों से होती हुई स्वर्णकार मांगलिक भवन पहुंची। इस संबंध में जानकारी देते हुए समाज के तुलसीराम पटेल, सुरेश गब्बर परमार, जेपी परमार, शिव परमार, विष्णु परमार ने बताया कि यात्रा के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों द्वारा श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। जगह-जगह शीतल पेय एवं प्रसादी की भी व्यवस्था की गई। रथ यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ के कारण कई प्रमुख मार्गों पर लगभग तीन घंटे तक यातायात प्रभावित रहा, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस एवं प्रशासन मुस्तैद रहा। ऐतिहासिक चल समारोह में दिल्ली से आए कलाकारों ने आकर्षक धार्मिक एवं सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। यात्रा में संत-महात्माओं की उपस्थिति के साथ भजन-कीर्तन मंडलियां, डीजे, ढोल-बाजे एवं पारंपरिक वाद्ययंत्र श्रद्धालुओं की आस्था को और अधिक प्रगाढ़ बना रहे थे।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा समाज को सनातन धर्म की एकता
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा समाज को सनातन धर्म की एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है। भगवान जगन्नाथ सभी के कल्याणकर्ता हैं और उनकी कृपा सभी भक्तों पर समान रूप से बनी रहती है। वहीं संत दुर्गाप्रसाद कटारे ने कहा कि जगदीश मंदिर शहर की प्राचीन धार्मिक धरोहर है और यह सभी सनातन प्रेमियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं। रथ यात्रा में शहर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। पुरी की तर्ज पर निकली भगवान जगन्नाथ की यह भव्य रथ यात्रा एक बार फिर शहर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी। श्रद्धालुओं के उत्साह, संतों के आशीर्वचन, भजन-कीर्तन और पुष्पवर्षा ने पूरे शहर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।

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