- पांच दिवसीय शिव महापुराण के समापन पर भावुक हुए श्रद्धालु, पवित्र रज माथे से लगाकर बोले-फिर लौटकर आएंगे कुबेरेश्वरधाम
- धाम की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें
ज्ञान को जीवन में उतारना ही सबसे बड़ी साधना : पंडित प्रदीप मिश्रा
शिव महापुराण के अंतिम दिवस अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि संसार में ज्ञान देने वालों की कमी नहीं है, लेकिन उस ज्ञान को अपने आचरण में उतारने वाले बहुत कम हैं। कथा कहना और प्रवचन देना सरल है, किंतु उन बातों को जीवन में अपनाना ही वास्तविक साधना है। आत्महत्या कभी मोक्ष का मार्ग नहीं हो सकती। वास्तविक मोक्ष अपने भीतर के अहंकार, मोह, लोभ और क्रोध का त्याग करने में है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन के संघर्षों से हार न मानने की अपील करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भगवान पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। सच्चा भक्त सेवा, समर्पण और सकारात्मक सोच के माध्यम से ही जीवन को सार्थक बनाता है। गुरु और शिष्य के बीच धन, वैभव या वस्तुओं का नहीं, बल्कि विचारों और संस्कारों का आदान-प्रदान होता है। यही संबंध जीवन को नई दिशा देता है। उन्होंने परिवार के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में केवल एक दिन मदर्स डे नहीं होता, बल्कि हर दिन मातृ-पितृ सेवा का दिवस है। माता-पिता की सेवा जीवन के अंतिम क्षण तक करते रहना ही सच्चा धर्म है।
कुबेरेश्वरधाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र : पंडित राघव मिश्रा
कथा के दौरान पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि कुबेरेश्वरधाम वह पावन भूमि है जहां श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक प्रबल हो जाता है। यहां कदम रखते ही भक्तों को आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य में यहां 100 से अधिक शिव महापुराण कथाओं का आयोजन हो चुका है और आज कुबेरेश्वरधाम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। शिव महापुराण कथा समापन की घोषणा होते ही पांडाल का दृश्य अचानक बदल गया। व्यास पीठ की ओर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जहां कुछ देर पहले कथा हो रही थी, वही स्थान भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बन गया। कारपेट हटाए गए और लोग नीचे की मिट्टी अपने हाथों से उठाकर इक_ा करने लगे। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग हर कोई इस पवित्र रज को अपने साथ ले जाने के लिए आतुर दिखा। कई श्रद्धालु माथे पर मिट्टी लगाते नजर आए, तो कई इसे थैलियों में भरकर घर ले गए, ताकि पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा कर सकें। पांडाल में भावनाओं का सैलाब भी साफ दिखा। हाथों में पोस्टर लिए श्रद्धालु लिख कर मन की भावनाएं व्यक्त कर रहे थे, कई लोग आंखों में आंसू लिए नजर आए। कथा समाप्त होते ही कुबेरेश्वरधाम के आस-पास और हाईवे पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन श्रद्धालुओं से भर गए। रात तक लोग अपने-अपने गंतव्य के लिए साधनों का इंतजार करते रहे, इसके अलावा वहीं लाखों की संख्या में आने-जाने वालों का क्रम देर तक चलता रहा। बुधवार को गुरु दीक्षा का एक दिवसीय कार्यक्रम भी है। इसलिए भी धाम पर आने का सिलसिला जारी है।
आज सुबह 9 बजे से होगा गुरु दर्शन एवं गुरु दीक्षा
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि बुधवार को प्रात: 9 बजे से गुरु दर्शन एवं गुरु दीक्षा महोत्सव का शुभारंभ होगा। इस दौरान पूज्य गुरुदेव श्रद्धालुओं को सत्संग का लाभ भी देंगे। सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक लाखों श्रद्धालु गुरु दीक्षा प्राप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि आयोजन को लेकर समिति और जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा, पेयजल, भोजन प्रसादी तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। पांच दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान सात लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

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