लापरवाही पड़ सकती है भारी -
कृषक राजेश मेवाड़ा ने कृषक बंधुओ से अपील करते हुए कहा कि अक्सर देखने में आता है कि किसान भाई खेतों में दवा छिड़कने के बाद उनके खाली डब्बों, थैलियों या बोतलों को वहीं मेड़ पर, कुएं के पास या खुले खेतों में ही छोड़ देते हैं। यह छोटी सी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ये रासायनिक दवाएं बेहद तेज और जहरीली होती हैं। खाली डिब्बों में बची हुई दवा की कुछ बूंदें भी इतनी खतरनाक होती हैं कि वे किसी की भी जान ले सकती हैं। हमें अपनी फसलों को बचाने के साथ-साथ अपने मवेशियों और परिवार की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखना होगा l खेतों या चरागाहों के आसपास चरने वाले गाय, भैंस और अन्य मवेशी अनजाने में इन डिब्बों को चाट लेते हैं या उनमें भरा दूषित पानी पी लेते हैं। इससे पशुओं की असमय मौत हो जाती है या वे गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार खेतों में घूमने वाले छोटे बच्चे खेल खेल में इन चमकदार और रंग-बिरंगी बोतलों को उठा लेते हैं। जानकारी के अभाव में वे इन्हें मुंह से लगा सकते हैं, जो सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो सकता है। बारिश के दिनों में इन खाली डिब्बों में बची दवा बहकर पास के जल स्रोतों कुएं तालाबों में मिल जाती है, जिससे पीने का पानी जहरीला हो जाता है। सुरक्षित निपटान के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय- उत्कृष्ट कृषक पशुपालक राजेश मेवाड़ा ने सभी किसान भाइयों से अपील की है कि दवाओं के इस्तेमाल के बाद डब्बों को तुरंत नष्ट करें lदवा खत्म होने के बाद खाली प्लास्टिक या टिन के डिब्बों को भारी पत्थर या औजार से पूरी तरह से नष्ट कर दे ताकि उनका दोबारा किसी भी काम में उपयोग न किया जा सके। नष्ट किए गए डिब्बों और थैलियों को आबादी और जल स्रोतों से दूर जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर दबा दें।

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