अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि रवि किशन का मामला मजबूत है, सुविधा का संतुलन उनके पक्ष में है तथा यदि तत्काल राहत नहीं दी गई तो उनकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति हो सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सेलिब्रिटी की पहचान, छवि और व्यक्तित्व का अनधिकृत उपयोग उसके निजता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। आदेश में प्रतिवादियों को तीन दिनों के भीतर आपत्तिजनक यूआरएल और सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो सूचना मिलने के 72 घंटे के भीतर संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म और डोमेन रजिस्ट्रार को कार्रवाई करनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जनरेटिव AI, मशीन लर्निंग और डीपफेक जैसी तकनीकों के माध्यम से भी रवि किशन की पहचान का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। वहीं, अदालत के आदेश पर रवि किशन ने कहा, "यह फैसला सिर्फ मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि हर कलाकार, जनप्रतिनिधि और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की गरिमा और पहचान की रक्षा का महत्वपूर्ण संदेश है। आज के डिजिटल दौर में एआई और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है। मैं माननीय दिल्ली हाईकोर्ट का आभारी हूं कि उसने मेरी प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय दिया। मुझे विश्वास है कि यह आदेश भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदारी और जवाबदेही को और मजबूत करेगा तथा किसी भी व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने में मील का पत्थर साबित होगा।"
पटना (रजनीश के झा)। अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, करण जौहर आदि की तरह अब दिल्ली हाईकोर्ट से भोजपुरी और हिंदी फिल्म जगत के लोकप्रिय अभिनेता तथा गोरखपुर से सांसद रवि किशन को पर्सनैलिटी राइट्स मिल गयी है, जो उनकी पहचान और सार्वजनिक छवि के दुरुपयोग के मामले में बेहद अहम है। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एकल पीठ ने पारित अंतरिम आदेश में रवि किशन के पक्ष में एक्स-पार्टी एड-इंटरिम इंजंक्शन जारी करते हुए उनकी अनुमति के बिना नाम, फोटो, आवाज, व्यक्तित्व और सार्वजनिक पहचान का व्यावसायिक या अन्य किसी भी रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी। यह आदेश आज 6 जुलाई को सार्वजनिक किया गया। गौरतलब है कि पर्सनैलिटी राइट्स किसी भी इंसान की तस्वीर, नाम, आवाज, हस्ताक्षर, स्टाइल या कैचफ्रेज (बोलने के अंदाज, स्टाइल या शैली) जैसी पहचान को बिना इजाजत इस्तेमाल करने से बचाते हैं। ये अधिकार कानून में अलग से दर्ज नहीं हैं, लेकिन अदालतें इन्हें गोपनीयता (प्राइवेसी), मानहानि और प्रचार अधिकारों से जोड़कर सुरक्षा देती हैं। देश में इससे जुड़े कई एक्ट हैं। कॉपीराइट एक्ट 1957 कलाकारों को अपने प्रदर्शन पर एक्सक्लूसिव और नैतिक अधिकार देता है। ट्रेड मार्क्स एक्ट 1999: नाम, हस्ताक्षर, टैगलाइन या कैचफ्रेज को ट्रेडमार्क कराया जा सकता है। अगर किसी का नाम या स्टाइल बिना अनुमति ब्रान्ड बेचने में इस्तेमाल हो रहा है, तो इसे रोकने का अधिकार है। बता दें कि रवि किशन ने अदालत में दायर वाद में कहा था कि पिछले कुछ समय से उनके नाम और छवि का दुरुपयोग कर अश्लील वेबपेज, फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट, अभद्र रील, एआई जनित वीडियो, डीपफेक सामग्री और आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा, निजता और सार्वजनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और संजय उपाध्याय ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि तीन दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर और जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी सार्वजनिक पहचान का गलत लाभ उठाया जा रहा है।

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