विचार-विमर्श के दौरान 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अनेक व्यावहारिक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल साक्षरता, उद्यमिता, पर्यावरणीय सततता, कौशल विकास तथा संवैधानिक मूल्यों को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाने पर बल दिया गया। साथ ही शिक्षकों के सतत प्रशिक्षण, शोध-आधारित शिक्षण पद्धति, संस्थागत नवाचार तथा शिक्षा संस्थानों, सरकार, उद्योग जगत एवं नागरिक समाज के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। संगोष्ठी में यह भी रेखांकित किया गया कि शिक्षा संस्थानों को अभिभावकों, स्थानीय समुदायों तथा सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर ऐसे समावेशी शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहिए, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को भी सुदृढ़ करे। इस अवसर पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इन्द्रेश कुमार भी विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि "शिक्षा एक सशक्त, समृद्ध, शांतिपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण की सबसे मजबूत नींव है। अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जागरूक, संस्कारित, कुशल और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करना भी है, जो संविधान के आदर्शों का पालन करते हुए समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान दें। भारत की विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। शिक्षा का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सद्भाव, देशभक्ति, सेवा और मानवीय मूल्यों की भावना विकसित करना होना चाहिए। 'विकसित भारत @2047' का सपना तभी साकार होगा जब प्रत्येक शिक्षण संस्थान चरित्र निर्माण, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण का केंद्र बने।"
डॉ. इन्द्रेश कुमार के विचारों का उपस्थित प्रतिभागियों ने जोरदार स्वागत किया। उनके उद्बोधन ने इस बात को पुनः स्थापित किया कि शिक्षा राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सद्भाव को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। संगोष्ठी में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और नेतृत्व क्षमता, नवाचार, समावेशी शिक्षा, डिजिटल परिवर्तन तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि शिक्षा के माध्यम से ही भारत की बहुलतावादी संस्कृति को सशक्त करते हुए विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने शिक्षा संस्थानों, नीति-निर्माताओं, नागरिक समाज एवं स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया, ताकि 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार किया जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक समावेशन, सांस्कृतिक सौहार्द और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। अंत में मुस्लिम विद्यार्थी प्रगति मंडल ने मुख्य अतिथि डॉ. शाहिद अख्तर, डॉ. इन्द्रेश कुमार, सभी वक्ताओं, शिक्षाविदों, प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय विकास के लिए ऐसे संवादों को निरंतर आयोजित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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