वाराणसी : जब शिवमय होगी काशी, तब आस्था का हर कदम होगा सुव्यवस्थित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 8 जुलाई 2026

वाराणसी : जब शिवमय होगी काशी, तब आस्था का हर कदम होगा सुव्यवस्थित

  • करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत को श्री काशी विश्वनाथ धाम पूरी तरह तैयार

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। विश्व की आध्यात्मिक राजधानी काशी एक बार फिर शिवभक्ति के सबसे बड़े पर्व श्रावण मास के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। 30 जुलाई से 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक चलने वाले इस पावन महीने में करोड़ों शिवभक्तों के आगमन को देखते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम में सुरक्षा, सुविधा और सुगम दर्शन का ऐसा व्यापक खाका तैयार किया गया है, जिसमें श्रद्धालु की आस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और व्यवस्थाएं आधुनिक तकनीक से सुसज्जित रहेंगी। इसी क्रम में मंगलवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम के बोर्ड रूम में वाराणसी मंडल के आयुक्त एस. राजलिंगम तथा पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण, पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, सीआरपीएफ, एनडीआरएफ, पीएसी, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि इस बार श्रावण मास में केवल भीड़ प्रबंधन ही नहीं, बल्कि "सुरक्षित, समान और सहज दर्शन" को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया जाएगा।


आस्था के साथ अनुशासन का संदेश

बैठक में सभी विभागों को निर्देश दिया गया कि पेयजल, चिकित्सा, सुरक्षा, सफाई, पार्किंग, यातायात, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पीए सिस्टम), बिजली, सीसीटीवी, ई-रिक्शा तथा आपदा प्रबंधन सहित प्रत्येक व्यवस्था पूरी तरह समन्वित और प्रभावी हो। धाम के बाहर संकरी गलियों में लटक रहे बिजली के तारों को व्यवस्थित कर ऊपर कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना समाप्त हो सके।


श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत, भीड़ पर विशेष नियंत्रण

पिछले वर्षों के अनुभवों को देखते हुए इस बार जिग-जैग बैरिकेडिंग को और मजबूत बनाया जा रहा है। बैरिकेड के दोनों ओर अतिरिक्त सुरक्षा अवरोध लगाए जाएंगे ताकि भीड़ का दबाव नियंत्रित रहे। श्रद्धालुओं को उमस और गर्मी से राहत देने के लिए कतारों में इंडस्ट्रियल एयर कूलर लगाए जाएंगे। पूरे परिसर में नियमित अंतराल पर शीतल पेयजल उपलब्ध रहेगा। चिकित्सकीय टीमों के साथ ओआरएस, ग्लूकोज तथा प्राथमिक उपचार की भी व्यापक व्यवस्था रहेगी।


काशीवासियों को झांकी दर्शन की विशेष सुविधा

मंदिर प्रशासन ने काशीवासियों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। श्रावण सोमवार और प्रमुख पर्वों को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 4 से 5 बजे तथा शाम 4 से 5 बजे तक झांकी दर्शन की सुविधा उपलब्ध रहेगी।


घर बैठे होंगे बाबा विश्वनाथ के लाइव दर्शन

जो श्रद्धालु किसी कारणवश काशी नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए भी मंदिर प्रशासन ने डिजिटल व्यवस्था की है। श्रद्धालु मंदिर न्यास की आधिकारिक वेबसाइट, आधिकारिक यूट्यूब चैनल तथा अधिकृत प्रसारण माध्यमों के जरिए बाबा विश्वनाथ के लाइव दर्शन और पूजन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।


विशेष अपील : खाली पेट कतार में न लगें

पिछले वर्षों में श्रावण सोमवार को अत्यधिक भीड़ के कारण दर्शन में कई घंटे लगने की स्थिति बनी थी। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे खाली पेट कतार में प्रवेश न करें, पर्याप्त जल और भोजन ग्रहण करके ही दर्शन के लिए आएं ताकि स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से बचा जा सके।


मोबाइल, स्मार्ट वॉच और बड़े बैग पूरी तरह प्रतिबंधित

श्रावण मास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए धाम में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ईयरफोन, बैग, धातु की वस्तुएं, तंबाकू, नशीले पदार्थ, कॉस्मेटिक तथा अन्य प्रतिबंधित सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी। अत्यधिक भीड़ को देखते हुए इस बार निःशुल्क बैगेज काउंटर भी संचालित नहीं होंगे। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे ऐसी वस्तुएं अपने घर, होटल अथवा धर्मशाला में ही छोड़कर आएं।


प्रोटोकॉल दर्शन पूरी तरह बंद, सभी भक्तों के लिए एक समान व्यवस्था

श्रावण मास के दौरान किसी भी प्रकार के विशेष अथवा प्रोटोकॉल दर्शन की अनुमति नहीं होगी। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी वीआईपी अथवा विशेष व्यक्ति के लिए अलग से दर्शन व्यवस्था नहीं की जाएगी। सभी श्रद्धालु केवल कतार के माध्यम से ही बाबा के दर्शन करेंगे। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति विशेष दर्शन कराने या अपनी दुकान से प्रसाद खरीदने के बदले शीघ्र दर्शन कराने का दावा करता है तो वह ठगी का प्रयास है। ऐसे मामलों की तत्काल सूचना पुलिस अथवा मंदिर प्रशासन को देने की अपील की गई है।


चार सोमवार, चार दिव्य स्वरूप

इस वर्ष श्रावण मास में बाबा विश्वनाथ चार अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे—

3 अगस्त — श्री शंकर स्वरूप श्रृंगार

10 अगस्त — गौरी-शंकर श्रृंगार

17 अगस्त — अर्धनारीश्वर श्रृंगार

24 अगस्त — रुद्राक्ष श्रृंगार

27 अगस्त (पूर्णिमा) — झूला श्रृंगार

28 अगस्त (रक्षाबंधन) — सामान्य दर्शन


सात प्रमुख मार्गों से होगा प्रवेश

श्रद्धालुओं के लिए गेट संख्या-4, काशी द्वार (4बी), नंदू फेरिया, सिल्को मार्ग, ढुंढिराज, सरस्वती फाटक तथा भैरव द्वार सहित सात प्रमुख प्रवेश मार्ग निर्धारित किए गए हैं। हालांकि गंगा के बढ़ते जलस्तर की स्थिति में मंदिर घाट की ओर से प्रवेश अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।


छह स्थानों पर खोया-पाया केंद्र

श्रावण मेले में परिवार से बिछड़ने वाले श्रद्धालुओं की सहायता के लिए छह प्रमुख स्थानों पर खोया-पाया केंद्र बनाए जाएंगे। यहां पुलिस के साथ विशेष सहायता कर्मी भी तैनात रहेंगे।


वृद्धों और दिव्यांगों के लिए निःशुल्क गोल्फ कार्ट

वृद्ध, दिव्यांग, अशक्त श्रद्धालुओं तथा छोटे बच्चों की सुविधा के लिए गोदौलिया से मैदागिन तक निःशुल्क गोल्फ कार्ट संचालित किए जाएंगे ताकि उन्हें दर्शन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।


जलपान और स्वास्थ्य सुविधाओं का विशेष प्रबंध

भीड़ के दौरान आवश्यकता अनुसार श्रद्धालुओं को ओआरएस, ग्लूकोज, बिस्किट, टॉफी, चॉकलेट, गुड़ तथा शीतल पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। मंदिर परिसर में चिकित्सकीय टीमों के साथ एंबुलेंस भी चौबीसों घंटे तैयार रहेगी।


आस्था और आधुनिक प्रबंधन का अद्भुत संगम

श्रावण मास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का विराट उत्सव है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की चुनौती केवल भीड़ नियंत्रित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सम्मानजनक और सहज दर्शन उपलब्ध कराना भी है। इस वर्ष की तैयारियों से स्पष्ट है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम प्रशासन ने परंपरा और आधुनिक प्रबंधन का संतुलित मॉडल तैयार किया है। समान दर्शन की व्यवस्था, तकनीक आधारित लाइव प्रसारण, दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं, मजबूत सुरक्षा तंत्र और व्यापक स्वास्थ्य प्रबंधन इस बात का प्रमाण हैं कि काशी केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उत्कृष्ट व्यवस्थापन का भी उदाहरण बन रही है। श्रावण के पावन महीने में जब हर-हर महादेव के उद्घोष से संपूर्ण काशी गुंजायमान होगी, तब बाबा विश्वनाथ का धाम केवल मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति का जीवंत केंद्र बनकर विश्व को भारतीय अध्यात्म की विराटता का संदेश देगा।

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