सीहोर : सात दिवसीय ऑनलाइन शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 8 जुलाई 2026

सीहोर : सात दिवसीय ऑनलाइन शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ

  • अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा बोले-संतान होना भाग्य की बात, लेकिन संतान से सुख मिलना सौभाग्य की बात
  • आत्मविश्वास और शिवभक्ति का संगम व्यक्ति को जीवन की हर चुनौती से लड़ने की शक्ति देता : कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा

Shiv-mahapuran-sehore
सीहोर। संतान होना भाग्य की बात है, लेकिन संतान से सुख प्राप्त हो जाना सौभाग्य की बात है।  माता-पिता के संस्कार ही संतान के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनते हैं और परिवार में प्रेम, सम्मान एवं धर्म का वातावरण होना आवश्यक है। उक्त विचार बुधवार से आरंभ हुई सात दिवसीय आन लाइन शिव महापुराण के पहले दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। इस मौके पर पंडित श्री मिश्रा के पुत्र कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति देते हुए अपने प्रवचन के दौरान कहाकि सबसे पहले स्वयं पर विश्वास करना सीखिए, उसके बाद भगवान शिव पर भरोसा रखिए। आत्मविश्वास और शिवभक्ति का संगम व्यक्ति को जीवन की हर चुनौती से लड़ने की शक्ति देता है। सात दिवसीय ऑनलाइन शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। कथा का सीधा प्रसारण ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहा है, जिसे देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु अपने घरों से श्रवण कर रहे हैं। कथा के पहले दिन पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि भगवान शिव मनुष्य के अवगुणों को नहीं, बल्कि उसके गुणों को देखते हैं। जैसे माता-पिता अपने बच्चों की गलतियों को क्षमा कर उन्हें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, उसी प्रकार भगवान शिव भी अपने भक्तों के दोषों को दूर कर उन्हें सद्गुणों की ओर अग्रसर करते हैं।


संसार के प्रत्येक प्राणी के भीतर ईश्वर का वास

पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि इस संसार के प्रत्येक प्राणी के भीतर ईश्वर का वास है। इसलिए सभी के प्रति प्रेम, करुणा और सम्मान का भाव रखना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में तीन कार्य करने का संदेश दिया। पहला, प्रतिदिन भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करें। दूसरा, भगवान पर अर्पित जल का आचमन करें, जिससे रोगों के निवारण की कृपा प्राप्त होती है। तीसरा, रवि प्रदोष के दिन बेलपत्र का पौधा लगाएं, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। पंडित श्री मिश्रा ने श्रद्धालुओं द्वारा भेजे गए अनेक पत्रों का वाचन भी किया और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यह कथा ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जा रही है, इसलिए श्रद्धालु घर बैठे श्रद्धा और एकाग्रता के साथ कथा का श्रवण करें तथा भगवान शिव की भक्ति से अपने जीवन को धन्य बनाएं। कथा के दौरान उत्तरप्रदेश से आए महिला के पत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि मैं संगीता बाथम उनका पुत्र 14 सालों से पलंग पर था, लेकिन जैसे ही उन्होंने भगवान शिव पर विश्वास करते हुए इलाज के साथ भगवान पर चढ़ाए जल का सेवन अपने पुत्र को कराया है, आज वह चलने लगा है, इस दौरान पंडित श्री मिश्रा ने आए हुए परिवार को वेलपत्र दिया। 

कोई टिप्पणी नहीं: