- भगवान राम का जीवन मानवता के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक -संत माधवदास महाराज

सीहोर। राम केवल अयोध्या के राजा नहीं थे, अपितु वे प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक समाज, और प्रत्येक हृदय में बसने वाले आदर्श पुरुष हैं। उनके जीवन में मर्यादा, त्याग, सत्य, करुणा, कर्तव्य निष्ठा, और लोक मंगल की भावना समाहित है। यही गुण उन्हें जन जन के हृदय में स्थान दिलाते हैं। भगवान राम का जीवन मानवता के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक है। वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। उक्त विचार शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में जारी रामलीला में भगवान श्रीराम के राजतिलक और अभिषेक लीला के दौरान संत माधवदास महाराज ने कहे। इस मौके पर संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, सुनील राय पहलवान, सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट, आयुष गुप्ता सहित अन्य ने महंत बृजेश शर्मा सहित रामलीला मंडल का सम्मान किया। संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि रामलीला मंच पर श्रीराम के राजतिलक और अभिषेक की लीला शुरू होते ही पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। कलाकारों ने अपने अभिनय से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श स्वरूप को जीवंत किया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और पुष्पवर्षा के बीच भगवान श्रीराम का अभिषेक संपन्न हुआ। श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक, महिलाएं और बच्चे उपस्थित रहे। अभिषेक की लीला ने सत्य, धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन मूल्यों के प्रतीक भगवान श्रीराम के संदेश को दर्शाया।
श्रीराम-रावण युद्ध का मंचन हुआ
श्रीराम-रावण युद्ध का मंचन हुआ। इसमें धर्म की जीत हुई और भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया। राम के अग्निबाण से रावण धराशायी हो गया। लीला के दौरान, श्रीराम का अग्निबाण रावण की नाभि में लगा, जिसके बाद राक्षसराज धराशायी हो गया। रावण ने श्रीराम को प्रणाम कर अपने प्राण त्यागे। रावण वध होते ही दर्शकों में खुशी की लहर दौड़ गई। पूरा माहौल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। इसके बाद रावण के पुतले का दहन किया गया, जो उसके अहंकार के अंत का प्रतीक था। रावण जहां अट्टहास कर रहा था, वहीं श्रीराम गंभीरता से अपने रामत्व का परिचय दे रहे थे। अंतत: श्रीराम के अग्निबाण से रावण का शरीर जमीन पर गिर पड़ा।
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