आर्या.एजी के चीफ बिजनेस ऑफिसर, रितेश रमन ने कहा, "बिहार का मक्का उत्पादक क्षेत्र भारत की ग्रेन वैल्यू चेन में तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और छोटे किसानों के लिए संगठित खरीद व्यवस्था भरोसेमंद संस्थागत बाजारों तक बेहतर पहुँच स्थापित कर सकती है। स्थानीय स्तर पर एकत्रीकरण, किसानों में गुणवत्ता संबंधी जागरूकता, गुणवत्ता पर आधारित प्रक्रियाएँ और खरीदारों से मजबूत जुड़ाव, मिलकर फार्मगेट स्तर पर किसानों के लिए अधिक मूल्य सृजित कर सकते हैं। यह उपलब्धि इसी का प्रमाण है।“ पीक सीजन में फील्ड टीमों के लिए खरीद प्रक्रिया केवल उपज खरीदने तक सीमित नहीं होती। इसमें किसानों, सीवीआरपीज़, एफपीओ प्रतिनिधियों, श्रमिकों, ट्रांसपोर्टर्स और खरीदार टीमों के बीच लगातार तालमेल की जरूरत होती है। हर ट्रक की आवाजाही समय पर मक्का के एकत्रीकरण, गुणवत्ता जाँच, जरूरी दस्तावेज़ तैयार करने और रूट प्लानिंग पर निर्भर करती है। इस सीजन में गुणवत्ता संबंधी जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया गया। अलग-अलग खरीद केंद्रों से मक्का आने के कारण, टीम ने किसानों और एफपीओ के साथ मिलकर मक्का को सही तरीके से सुखाने, नमी प्रबंधन और खरीदारों की गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्ता मानकों पर मार्गदर्शन दिया। इन प्रयासों से खरीद प्रक्रिया में अनुशासन मजबूत हुआ और खरीदारों का भरोसा भी बढ़ा। उपज संग्रह, गुणवत्ता जाँच, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, वित्त और संस्थागत बाजारों तक पहुँच को एक साथ जोड़ते हुए, आर्या.एजी का पोस्ट-हार्वेस्ट इकोसिस्टम किसानों के लिए एक समग्र व्यवस्था उपलब्ध कराता है। बिहार में इस मॉडल से एफपीओ को औपचारिक कृषि बाजारों से अधिक आत्मविश्वास के साथ जुड़ने में मदद मिली। वहीं, रीगाल को अधिक व्यवस्थित खरीद प्रक्रिया के जरिए एकत्रित मक्का तक पहुँच मिली।
यह पहल किसानों को सीधे प्रोसेसर से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रोसेसर के लिए भी अधिक मूल्य सृजित होता है। मक्का के स्रोत की पहचान होने से प्रोसेसर अपने कच्चे माल की आपूर्ति को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकता है और उसे आवश्यक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। विवेक लिल्हा, प्रोक्योरमेंट हेड, रीगाल रिसोर्सेज, ने कहा, “खरीद अवधि के दौरान प्रोसेसर्स के लिए भरोसेमंद कच्चे माल की सोर्सिंग बहुत जरूरी होती है। आर्या.एजी के साथ हमारी साझेदारी से मक्का खरीद प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई। संगठित तरीके से उपज जुटाने, गुणवत्ता जाँच, डिस्पैच योजना और फार्मगेट स्तर पर एफपीओ के साथ बेहतर समन्वय से खरीद प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी। गुणवत्ता मानकों पर स्पष्टता और उपज की बेहतर ट्रेसबिलिटी से हमें सोर्सिंग पर बेहतर नियंत्रण मिला और हमारी उत्पादन आवश्यकताओं के अनुरूप खरीद को संचालित करने में मदद मिली।“ 1,500 मीट्रिक टन से अधिक मक्का की सफल खरीद दिखाती है कि मजबूत फील्ड निष्पादन, स्थानीय साझेदारियों और टीमों के समन्वित प्रयासों के जरिए व्यस्त खरीद अवधि में भी कृषि सप्लाई चेन को प्रभावी ढंग से सहयोग दिया जा सकता है।
बिहार में खरीद प्रक्रिया जारी रहने के साथ, आर्या.एजी एफपीओ, सीवीआरपीज़ और खरीदार टीमों के साथ मिलकर आने वाले हफ्तों की योजना को और मजबूत कर रहा है। इस अनुभव के आधार पर, टीम अगले सीजन में खरीदारों की जरूरतों और किसानों/ एफपीओ की तैयारी के अनुरूप मक्का की किस्मवार खरीद की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। शोएब अख़्तर, नेशनल इम्प्लीमेंटेशन लीड, आर्या.एजी, ने कहा, “फार्मगेट प्रोक्योरमेंट तब सबसे बेहतर होती है, जब किसानों को कीमत, गुणवत्ता मानकों और खरीदारों की अपेक्षाओं की स्पष्ट जानकारी होती है। इस पहल के माध्यम से आर्या.एजी ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, गुणवत्ता आश्वासन और विश्वास बढ़ाने में मदद की है। एफपीओ, सीवीआरपीज़ और किसान समूहों के साथ मिलकर, हमने मक्का के बेहतर एकत्रीकरण, गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं पर किसानों का मार्गदर्शन करने और मक्का उत्पादकों को संस्थागत खरीदारों से अधिक भरोसेमंद तरीके से जोड़ने में मदद की है।“ यह उपलब्धि दर्शाती है कि फार्मगेट स्तर पर बेहतर तालमेल, किसानों में गुणवत्ता संबंधी जागरूकता और भरोसेमंद संस्थागत बाजारों से जुड़ाव, एफपीओ और उनसे जुड़े छोटे किसानों के लिए अधिक मूल्य सृजित कर सकते हैं।

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