सीहोर : मरीह माता पर गुप्त नवरात्रि के पहले दिन दुर्गा चालीसा और दुर्गा पाठ - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 15 जुलाई 2026

सीहोर : मरीह माता पर गुप्त नवरात्रि के पहले दिन दुर्गा चालीसा और दुर्गा पाठ

  • 150 साल प्राचीन मरीह माता मंदिर में प्रथम दिन दुर्गा सप्त शती के पाठ के साथ श्रद्धालुओं ने दी आहुतियां

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सीहोर। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी शहर के विश्रामघाट मां चौसट योगिनी मरीह माता मंदिर में गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया  जा रहा है। इसके पहले दिन यहां पर उपस्थित आधा दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने यज्ञाचार्य पंडित मोहन शर्मा के मार्गदर्शन में बुधवार की सुबह दुर्गा सप्त शती के पाठ के साथ श्रद्धालुओं ने दी आहुतियां दी। यहां पर हर रोज शाम को हवन यज्ञ के साथ आहुतियां दी जाएगी। इस संबंध में मंदिर के व्यवस्थापक गोविन्द मेवाड़ा, रोहित मेवाड़ा ने बताया कि कुल चार नवरात्रि का वर्णन है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं। एक गुप्त नवरात्रि माघ और दूसरी आषाढ़ के महीने में पड़ती है। इस समय आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का महोत्सव है और श्रद्धालुओं के द्वारा नियमित रूप से आहुतियां दी जाएगी। संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुतियां दी। यहां पर अष्टमी पर कन्या भोज का आयोजन किया जाएगा।


बुधवार की सुबह यहां पर मौजूद श्रद्धालु फूलों से माता का श्रृंगार किया और उसके पश्चात यज्ञ में देवी का आह्वान कर आहुतियां दी। मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा के लिए समर्पित होता है। मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं।  माता के नाम का अर्थ भी पर्वत की बेटी ही है, अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण करने वाली माता शैलपुत्री की साधना करने पर कुंडली से जुड़ा चंद्र दोष और उससे होने वाली सारी परेशानियां दूर होती हैं। मां की पूजा से व्यक्ति के जीवन में उनके नाम की तरह स्थिरता बनी रहती है। उन्होंने बताया कि  गुरुवार को सुबह  देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र, साधना और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सामान्य नवरात्रि की तरह इसमें नौ देवियों के बजाय 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां काली या कुछ परंपराओं में मां शैलपुत्री के स्वरूप में तांत्रिक पूजन की आराधना की जाती है।  दस महाविद्या: काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला। प्रथम दिन की देवी: नवदुर्गा की प्रथम देवी मां शैलपुत्री और दस महाविद्या की प्रथम देवी माता कालिका। यहां पर माता कालिका की पूजा विधि और आरती।

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