- 150 साल प्राचीन मरीह माता मंदिर में प्रथम दिन दुर्गा सप्त शती के पाठ के साथ श्रद्धालुओं ने दी आहुतियां
बुधवार की सुबह यहां पर मौजूद श्रद्धालु फूलों से माता का श्रृंगार किया और उसके पश्चात यज्ञ में देवी का आह्वान कर आहुतियां दी। मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा के लिए समर्पित होता है। मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं। माता के नाम का अर्थ भी पर्वत की बेटी ही है, अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण करने वाली माता शैलपुत्री की साधना करने पर कुंडली से जुड़ा चंद्र दोष और उससे होने वाली सारी परेशानियां दूर होती हैं। मां की पूजा से व्यक्ति के जीवन में उनके नाम की तरह स्थिरता बनी रहती है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को सुबह देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र, साधना और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सामान्य नवरात्रि की तरह इसमें नौ देवियों के बजाय 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां काली या कुछ परंपराओं में मां शैलपुत्री के स्वरूप में तांत्रिक पूजन की आराधना की जाती है। दस महाविद्या: काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला। प्रथम दिन की देवी: नवदुर्गा की प्रथम देवी मां शैलपुत्री और दस महाविद्या की प्रथम देवी माता कालिका। यहां पर माता कालिका की पूजा विधि और आरती।

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