नगर पालिका परिषद चुनाव के दौरान वार्ड नम्बर 11 में लुनिया मोहल्ला निवासी लोकेंद्र वर्मा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। चुनाव में वर्मा के सामने भाजपा से नीरज जाटव, कांग्रेस से नरेंद्र खंगराले, बसपा से धनराज फरेला और 4 निर्दलीय सहित कुल 7 प्रत्याशी थे। पार्षद वर्मा ने नागरिकों की उम्मीद से भी अधिक बीते चार साल के दौरान वार्ड में विकास कार्य करा दिए है। इसी बीच चुनावी हार से दुखी कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र खंगराले ने लोकेंद्र वर्मा की जाति को लेकर आपत्ति दर्ज कराई खंगराले का कहना था की वर्मा अनुसूचित जाति में नहीं पिछड़ा वर्ग में आते है। खास बात यह है कि वार्ड की जनता में वर्मा के जाति प्रमाण पत्र को लेकर कोई नाराजगी नहीं थी। खंगराले के द्वारा स्थानीय नगर पालिका कार्यालय एसडीएम न्यायालय में वर्मा के जाति प्रमाण पत्र को लेकर दायर किए गए परिवाद को खारिज कर दिया गया था। इस दौरान भी लोकेंद्र वर्मा अपने वार्ड में निर्माण कार्यों को लेकर सक्रिय बने रहे और लाखों रूपये के जनहितैषी कार्य संपन्न कराए। पार्षद लोकेंद्र वर्मा ने कहा कि चुनावों में 6 प्रत्याशी और थे लेकिन किसी ने भी और नागरिकों जाति को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है वह सभी प्रत्याशी और नागरिक वार्ड में हो रहे विकास कार्यो और नागरिकों को मिल रहे शासकीय योजनाओं के लाभ से प्रसन्न है। वर्मा ने कांग्रेस नेता और वार्ड में प्रत्याशी रहे नरेंद्र खंगराले पर वार्ड में जारी विकास कार्यो से चिड़कर झूठे मनघडंत आरोप लगाकर छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है। वर्मा ने कहा कि जात पात से ऊपर उठकर हमेशा जनता के हित में काम करते रहेंगे यही संकल्प है।
सीहोर। हाईकोर्ट ने झूठे मनघडंत आरोप लगाकर सेवाधर्मी पार्षद की छवि को धूमिल करने पर कड़ा एक्शन लिया है। हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति बहुल वार्ड के पार्षद लोकेंद्र वर्मा के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी हैै। स्थगन आदेश से यह साबित हो गया है कि अब अनुसूचित जाति वर्ग के लोंकेंद्र वर्मा वार्ड नम्बर 11 के पार्षद बने रहेंगे। कांग्रेस नेता नरेंद्र खंगराले के द्वारा लोकेंद्र वर्मा को जाति के आधार पर पार्षद पद से हटाने के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की गई थी और वर्मा के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग की गई थी। गठित समिति ने वर्मा के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के लिए आदेश पारित किया था जिस पर पार्षद लोकेंद्र वर्मा ने जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थगन याचिका दायर की थी। जिस के बाद हाईकोर्ट ने वर्मा के अधिवक्ता धीरज कुमार तिवारी के द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर पार्षद लोकेंद्र वर्मा के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी हैै।

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