- कार्यकर्ताओं ने लगाए शारीरिक और आर्थिक शोषण के आरोप
- पीड़ित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने की सुपरवाइजरों पर कार्रवाई की मांग
आक्रोशित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि पहले सेक्टर कार्यालय से सामग्री गांव सेक्टर तक पहुंचाई जाती थी। अब हमें सीहोर कार्यालय बुलाकर सामग्री दी जाती है। आने-जाने और भाड़े में काफी रुपए खर्च हो रहे हैं यह राशि विभाग हमें नहीं देता है। यही नहीं महिला कार्यकर्ताओं के लिए कार्यालय में शौचालय की सुविधा भी नहीं है। शौचालय में ताला लगा रहता है और कहा जाता है कि बाहर ग्राउंड में चली जाओ। यह महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध है। विभाग के अधिकारियों के द्वारा महीने में 4-5 बार मीटिंग प्रोग्राम के लिए बुलाया जा रहा है जिस का भत्ता नहीं दिया जाता है। यदि कोई हितग्राही या सरपंच कार्यकर्ता का अपमान करता है तो अधिकारी कार्यकर्ता का पक्ष न लेकर उसी की कमियां निकालकर सबके सामने बेइज्जत करते हैं। समूह या सहायिका की गलती होने पर बिना नोटिस वेतन केवल कार्यकर्ता का काटा जाता है। कलेक्ट्रेट पहुंची आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में शकुन सोनी, शीला मेवाड़ा, हेमलता मेवाड़ा, रेणुका वर्मा, सुनीता प्रजापति, रामसभा परमार, नर्बदी यूके।प्रीति, पुष्पा, सरोज, धापू, प्रीति रघुवंशी, यशोदा, तुलसी मालवीय, विमला परमार, रेणुका सेन, सुरुणा वर्मा, वेवी कुवर, अनीता वर्मा, प्रिती मालवीय, रीना मेवाड़ा, रेखा, साजिदा बी, मनीषा वर्मा, तारा शर्मा, संगीता वर्मा, रेनू पिपलोदिया, शावना अली,नैन्सी आदि शामिल रही।

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