खेग्रामस की प्रमुख मांगें
राशन सूची से गरीबों के नाम काटने का फैसला वापस लिया जाए और सभी पात्र परिवारों को राशन कार्ड दिया जाए।
गरीब परिवारों को कुपोषण से बचाने के लिए बिहार सरकार अपने बजट से दाल उपलब्ध कराए।
मनरेगा को कमजोर करने वाली नीतियों पर रोक लगाकर काम और उचित मजदूरी की गारंटी दी जाए।
अकुशल ग्रामीण मजदूरों के लिए ₹700 प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी घोषित की जाए।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, सम्मान और रोजगार की गारंटी के लिए प्रभावी कानून बनाया जाए।
गरीब मजदूरों और किसानों से पानी, सफाई एवं होल्डिंग टैक्स की वसूली बंद की जाए।
सभी वृद्ध, दिव्यांग एवं विधवा लाभार्थियों को ₹3,000 मासिक पेंशन दी जाए।
शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाकर सरकारी विद्यालयों को बेहतर संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से विकसित किया जाए।
अति पिछड़ी जातियों की सुरक्षा एवं सम्मान के लिए प्रभावी कानून बनाया जाए।
सभी पर्चाधारियों को उनकी पर्चा वाली जमीन पर तत्काल दखल-कब्जा दिलाया जाए।
गरीबों को उजाड़ने से पहले उन्हें बसाने की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
सभी भूमिहीन गरीब परिवारों को अभियान बसेरा योजना के तहत 5 डिसमिल सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाए।
वर्षों से सरकारी एवं गैर-मजरुआ जमीन पर बसे गरीब परिवारों को तत्काल बासगीत पर्चा दिया जाए।
गरीबों के जमीन एवं आवास के अधिकार की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा जबरन बेदखली पर रोक लगाई जाए।
सत्याग्रह के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार एवं प्रशासन से मांग की कि गरीबों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए और उनकी जमीन, आवास, रोजगार, राशन एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण गरीबों की भागीदारी ने स्पष्ट किया कि कलुआही में गरीबों के अधिकारों की लड़ाई अब और व्यापक होगी। वक्ताओं ने कहा कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।

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