- सैकड़ों गरीब-मजदूरों ने लिया हिस्सा
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के जिला सचिव कॉ. ध्रुव नारायण कर्ण ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार गरीब मजदूरों पर बुलडोजर चला रही है। इस बुलडोजर सरकार के खिलाफ जुझारू व धारावाहिक आंदोलन खड़ा करने का संकल्प लेने की आवश्यकता पर बल दैते हुये देश के छात्र-युवा आंदोलन से प्रेरणा लेने का अपील किया ,उन्होंने आगे कहा कि आज भी बड़ी संख्या में गरीब परिवार भूमिहीन होकर रहने को मजबूर हैं। सरकार गरीबों को उजाड़ने के बजाय उन्हें बसाने तथा उनके भूमि अधिकार की गारंटी करे। उन्होंने कहा कि जहां गरीब वर्षों से बसे हुए हैं, उन्हें पी.पी. एक्ट 1947 के तहत बासगीत पर्चा दिया जाए तथा सभी भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराई जाए। प्रत्येक पंचायत में भूमिहीनों के लिए आवासीय कॉलोनी बनाने, आवास की राशि बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने तथा जमीन की मालिकाना कागज की शर्त वापस लेने की मांग भी उन्होंने उठाई।
वक्ताओं ने राशन सूची से गरीबों के नाम काटने का आदेश वापस लेने, सभी गरीब परिवारों को राशन कार्ड देने, मनरेगा को मजबूत कर नियमित काम एवं उचित मजदूरी देने तथा अकुशल मजदूरों के लिए 700 रुपये दैनिक न्यूनतम मजदूरी घोषित करने की मांग की। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, सम्मान एवं रोजगार की गारंटी, गांवों में पानी-सफाई एवं होल्डिंग टैक्स वसूली बंद करने, वृद्ध, दिव्यांग एवं विधवाओं को 3,000 रुपये मासिक पेंशन, शिक्षा के निजीकरण पर रोक तथा सरकारी विद्यालयों को नवोदय विद्यालय के स्तर पर विकसित करने की मांग भी प्रमुख रही। सभा में अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति/जनजाति की तरह सुरक्षा एवं सम्मान देने के लिए कानून बनाने की मांग को भी जोरदार ढंग से उठाया गया। अंत में आंदोलनकारियों ने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की और संघर्ष को आगे भी तेज करने का संकल्प लिया। सभा को श्याम पंडित, सुनीता देवी सदाय, धर्मदास पासवान, फकीर पासवान ,राम विनय पासवान,अशर्फी सदाय,राजेंद्र पासवान, शिवजी राम,घोघी सदाय,उत्तीम कामत, जानकी देवी,चंदेश्वर पासवान वगैरह ने भी संबोधित किया। जबकि सैकड़ो ग्रामीण महिलाओं पुरुषो ने भाग लिया.

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