न्यायाधीश ने कहा कि क्लब को संपदा अधिकारी के समक्ष अपना जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘संपदा अधिकारी के रिकॉर्ड के अवलोकन से स्पष्ट है कि अपीलकर्ता को अपना जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए अधिक अवसर दिए गए थे, लेकिन उसने अपना जवाब दाखिल नहीं किया।’’ अदालत ने इस बात को रेखांकित किया कि 1994 के बाद केंद्र सरकार ने क्लब के पट्टे के नवीनीकरण के लिए कोई दस्तावेज जारी नहीं किया था। अदालत ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता ने दलील दी है कि वह बिना किसी चूक के नियमित रूप से किराए का भुगतान करता रहा है; इसलिए उसे अनधिकृत कब्जाधारी नहीं कहा जा सकता।’’ क्लब ने दलील दी कि बेदखली की कार्यवाही नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन थी। उसका कहना था कि उसे सरकार द्वारा की गई शिकायत की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई थी। अदालत ने हालांकि इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि संपदा अधिकारी ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि दस्तावेज क्लब के सचिव को उपलब्ध कराए गए थे और सचिव ने आदेश-पत्रों पर हस्ताक्षर भी किए थे। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार ने संपदा अधिकारी के समक्ष कार्यवाही शुरू की थी। इसके बाद संपदा अधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसके जवाब में क्लब पेश हुआ और अपना जवाब दाखिल करने के लिए कई बार समय मांगा। अदालत ने कहा कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद क्लब ने संपदा अधिकारी के समक्ष न तो कोई जवाब दाखिल किया और न ही अपना कोई पक्ष रखा। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर संपदा अधिकारी ने बेदखली का आदेश पारित कर दिया। अदालत ने मुख्य अपील के अंतिम निपटारे के लिए मामले में अगली सुनवाई की तिथि 26 सितंबर तय की है।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने दिल्ली रेस क्लब की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार की ओर से जारी बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध किया था। अदालत ने कहा कि क्लब अपने पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला साबित करने में विफल रहा है। क्लब ने इस वर्ष 11 अगस्त को संपदा अधिकारी द्वारा दिल्ली रेस क्लब को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत बेदखली आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। अदालत ने मंगलवार को पारित अपने आदेश में कहा कि 1994 के बाद केंद्र सरकार ने क्लब के पट्टे का नवीनीकरण करने संबंधी कोई दस्तावेज जारी नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद क्लब ने संपदा अधिकारी के समक्ष न तो कोई जवाब दाखिल किया और न ही अपना कोई पक्ष रखा और इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर संपदा अधिकारी ने बेदखली का आदेश पारित कर दिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीतांबर दत्त ने कहा, ‘‘मेरा सुविचारित मत है कि अपीलकर्ता (क्लब) विवादित आदेश पर रोक लगाने के लिए प्रथम दृष्टया कोई ठोस आधार प्रस्तुत करने में विफल रहा है। इसलिए अंतरिम रोक के लिए दायर आवेदन खारिज किया जाता है।’’

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