फिर जाने कब हमारे रास्ते बदल गए,
मैं अपनी कमियाँ ढूँढ़ती रह गई,
और तुम किसी नए रिश्ते में ढल गए,
टूटे रिश्ते जोड़ने की कोशिश बहुत की,
पर कुछ दूरियाँ चाहकर भी मिटती नहीं,
मेरे हिस्से रह गईं कुछ ख़ामोश सी यादें,
और दोस्ती से उठता हुआ एक सवाल कहीं।।
प्रियांशी
कक्षा 11वीं,
ग्वालदम, उत्तराखंड
टीम गांव की आवाज

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