कविता : नारी सशक्तिकरण - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 9 अगस्त 2026

कविता : नारी सशक्तिकरण

Disha-ganv-ki-awaz

वो चूल्हा-चौका ही नहीं, अब कलम भी चलाती है,

लड़की कोई बोझ नहीं, अब आसमान छू जाती है,

कोमल और कमजोर नहीं, हर तूफान से लड़ती है,

शिक्षा की मशाल थाम कर अंधेरों को हरती है,

बेटी, बहन, माँ बनकर अपने हक की बात करती है,

सपनों को पंख लगाकर अपनी राह खुद चुनती है,

झुकेगी नहीं, रुकेगी नहीं, हर मुश्किल से लड़ेगी,

अपने फैसलों और सपनों की खुद आवाज़ बनेगी।

नारी है वो, शक्ति है वो, बदलाव की पहचान है,

अपने हौसले से लिखती अब अपनी नई उड़ान है।।





दिशा

उम्र 18 वर्ष,

जगथाना, उत्तराखंड

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