- सुबह चार बजे से देर रात तक कांवड़ यात्रियों की आवाजाही, सड़क किनारे जगह-जगह सेवा पंडालों में हुआ श्रद्धालुओं का स्वागत
सड़क किनारे लगाए सेवा पंडाल, कांवड़ यात्रियों की सेवा में जुटे सेवादार
कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक जगह-जगह सेवा पंडाल लगाए गए। इन पंडालों में श्रद्धालुओं के लिए चाय, फलाहार, पेयजल एवं भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था की गई। स्थानीय समाजसेवियों, धार्मिक संगठनों और शिवभक्तों ने पूरे सेवाभाव के साथ कांवड़ यात्रियों का स्वागत किया। कांवड़ यात्रा में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु सीवन नदी तट पहुंचे। लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के कारण सीवन नदी तट और कुबेरेश्वरधाम के आसपास का क्षेत्र धार्मिक उत्सव के रूप में नजर आया। शहरवासियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक कांवड़ यात्रा और शिवभक्ति को लेकर किए जा रहे आह्वान के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। सीवन नदी तट अब बड़ी संख्या में शिवभक्तों के लिए धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिवभक्तों को संदेश देते हुए कहा कि पूरे वर्ष भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करना चाहिए, वहीं सावन मास में दो लोटा जल से भगवान शिव का अभिषेक करें। उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा-अर्चना सच्चे विश्वास और श्रद्धा के साथ करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
घर बैठे ऑनलाइन शिव महापुराण कथा का श्रवण करें
ऑनलाइन कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने देशभर के शिवभक्तों से अपील की कि वे अपने-अपने घरों पर ऑनलाइन श्री कांवड़ शिव महापुराण कथा का श्रवण करें। सावन मास के अवसर पर पांच दिवसीय ऑनलाइन शिव महापुराण कथा का शुभारंभ किया गया है, जिसमें शिवभक्ति और भगवान शिव की महिमा से जुड़े प्रसंगों का श्रवण कराया जा रहा है।
पहले सोमवार को डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सावन के पहले सोमवार को डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और समिति द्वारा सुरक्षा, यातायात, पेयजल, चिकित्सा सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। उन्होंने बताया कि सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक आने वाले कांवड़ यात्रियों के लिए विभिन्न स्थानों पर चाय, फलाहार और पेयजल की व्यवस्था की गई है। सेवादार लगातार श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हुए हैं। सावन के पहले सोमवार पर सीवन नदी तट से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक दिखाई दिया यह नजारा भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और विश्वास को दर्शाता रहा। देर रात तक कांवड़ यात्रियों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा और पूरा मार्ग शिवमय नजर आया।

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