सीवन नदी के तट पर 21 से अधिक पवित्र नदियों के जल से भगवान शिव का विशेष अभिषेक किया गया। इसके उपरांत मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर संत माधवदास महाराज ने कहा कि सावन मास भगवान शिव की आराधना का पवित्र समय है और चारों ओर शिव भक्ति का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने कहा, जो अमृत पीते हैं, वे देव कहलाते हैं और जो विष पीते हैं, वे महादेव कहलाते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव की भक्ति और आराधना में सहभागी बनने का आह्वान किया। पालकी यात्रा के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने कहा कि सावन मास में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। इसी धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए भगवान शिव का 21 से अधिक नदियों के पवित्र जल से अभिषेक किया गया। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य शहरवासियों में धार्मिक आस्था, भक्ति और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि विधि-विधान से रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही ग्रहजनित दोषों एवं विभिन्न प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलने की भी मान्यता है। सावन में सोमवार के दिन प्रात: स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक करने की परंपरा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि शिव आराधना से सुख-समृद्धि, संतान सुख, वैभव एवं यश की प्राप्ति होती है तथा जीवन के संकट दूर होते हैं। भव्य शिव पालकी कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी ने पूरे आयोजन को भक्तिमय बना दिया।
सीहोर। सावन मास के पावन अवसर पर रविवार को शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर से भगवान शिव की भव्य पालकी कांवड़ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग में हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण शिवमय हो गया। श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर से भगवान शिव को आकर्षक पालकी में विराजमान कर श्रद्धालु शहर की जीवनदायिनी मां सीवन नदी के तट पर पहुंचे। यहां संत माधवदास महाराज सहित समाजसेवी श्रीमती रेखा राय, सुनील राय, मनोज दीक्षित मामा, सोनू केवट, कार्तिक गोगिया, दुर्गेश यादव, बाबू, रोहित सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। संत और श्रद्धालुओं ने यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले कार्तिक गोगिया, भजन मंडल के दुर्गेश यादव और बाबू, आयुष गुप्ता आदि का स्वागत और सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बाबू सतेन्द्र राय, लक्की सौलंकी, दीपक सौलंकी, राजा सौलंकी, कपिल, लल्लू, गुल माला, कृष्णकांत, गोदवारी, विष्णु बाई, गंगा यादव, प्रियंका, आशीष यादव, सुमीत कुशवाहा, गगन कुशवाहा, आनंद कुशवाहा, वंश आदि शामिल थे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें