इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य चंदन कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही किसी भी प्रकार के लैंगिक उत्पीड़न एवं भेदभाव की रोकथाम का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने तथा किसी भी समस्या की स्थिति में उचित माध्यम से शिकायत करने एवं सहायता प्राप्त करने की अपील की। इसके पश्चात “नई उम्मीद – एक बेहतर कल” विषय पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से बी.के. सुधाकर, बी.के. आरती दीदी एवं बी.के. बहन पूजा ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया तथा मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, चिंता, सकारात्मक सोच, आत्म-संतुलन एवं ध्यान के महत्व पर मार्गदर्शन दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, अनुशासन, योग एवं राजयोग ध्यान के माध्यम से तनाव एवं चिंता को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। विद्यार्थियों को नियमित ध्यान के माध्यम से एकाग्रता बढ़ाने, मानसिक शांति बनाए रखने तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र के दौरान विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर लगभग 350 छात्र-छात्राओं एवं 50 शिक्षक एवं कर्मचारियों सहित कुल लगभग 400 प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति की शपथ ली। सभी ने नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ, सकारात्मक एवं जिम्मेदार जीवन जीने का संकल्प लिया। प्राचार्य चंदन कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य एवं नशा मुक्ति के महत्व पर कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके मानसिक, सामाजिक एवं नैतिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से तनाव को अपने ऊपर हावी न होने देने, नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहने तथा अपने जीवन में सकारात्मक सोच एवं अनुशासन को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकगण, कर्मचारियों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। दोनों जागरूकता सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुरक्षित परिसर, लैंगिक संवेदनशीलता, मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति एवं सकारात्मक जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के सभी संबंधित पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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