- पहाड़िया सीआरपीएफ कैंप में गूंजे भावुक शब्द—“अब तक आप हमें सलाम करते थे, आज हम आपको सलाम करते हैं”
- पूर्व संध्या पर मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने शहर के प्रमुख स्थलों पर फहराए विशाल राष्ट्रीय ध्वज, 100 फीट ऊंचे पोल पर लहराया नया तिरंगा, देशभक्ति से सराबोर हुआ पूरा शहर
“तिरंगा राष्ट्र की आत्मा है”
मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता, एकता, अखंडता और गौरव का जीवंत प्रतीक है। इसे सम्मान के साथ फहराना प्रत्येक नागरिक का गौरव भी है और जिम्मेदारी भी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें केवल अधिकारों की याद नहीं दिलाता, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि आजादी लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान से मिली है। अमृतकाल में हमारा दायित्व है कि हम राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करें और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
तिरंगों से धड़कता शहर
यू.पी. कॉलेज, पुलिस लाइन, आशापुरा चौराहा और अंबेडकर चौराहा-कचहरी में स्थापित लगभग 100 फीट ऊंचे ध्वजस्तंभों पर नए तिरंगे फहराए गए। इन स्थलों पर ध्वजों के प्रतिस्थापन के बाद स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों की भव्यता और बढ़ गई है। शाम ढलते-ढलते ये तिरंगे केवल ध्वज नहीं, बल्कि शहर की धड़कन बन गए थे। राहगीर रुककर उन्हें निहारते रहे, बच्चे उत्साह से तस्वीरें खिंचवाते रहे और बुजुर्गों की आंखों में स्वतंत्रता की स्मृतियां तैरती रहीं।
अंबेडकर को नमन, संविधान को प्रणाम
अंबेडकर चौराहा पहुंचने से पूर्व मंत्री ने अंबेडकर पार्क में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। यह दृश्य स्वतंत्रता, संविधान और सामाजिक न्याय की त्रयी को एक साथ उपस्थित करता दिखाई दिया।
काशी की हवा में घुली देशभक्ति
कार्यक्रमों के दौरान स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी संख्या मौजूद रही। हर स्थल पर राष्ट्रगान, वंदे मातरम् और भारत माता की जय के स्वर गूंजते रहे। विशाल तिरंगों के फहराए जाने के साथ ही काशी का वातावरण देशभक्ति से ओतप्रोत हो उठा।
तिरंगा केवल प्रतीक नहीं, सार्वजनिक संस्कार है
काशी में विशाल तिरंगों का यह अभियान महज सौंदर्यीकरण नहीं है। सार्वजनिक स्थलों पर लहराता तिरंगा नागरिक चेतना को प्रतिदिन यह स्मरण कराता है कि राष्ट्र केवल शासन से नहीं, साझा जिम्मेदारियों से बनता है। पहाड़िया सीआरपीएफ कैंप में बोले गए शब्द—“आज हम आपको सलाम करते हैं”—दरअसल नागरिक समाज और सुरक्षा बलों के बीच उस अदृश्य संबंध की स्वीकृति हैं, जिस पर राष्ट्र की सुरक्षा और विश्वास दोनों टिके हैं। जब शहर अपने सैनिकों को सम्मान देता है और तिरंगे को उत्सव नहीं, संस्कार की तरह स्वीकार करता है, तभी स्वतंत्रता दिवस सचमुच जनोत्सव बनता है।

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