- राजघाट पर 67.14 मीटर पहुंची गंगा, चार सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा पानी
- सलारपुर में घरों में घुसा चार फीट पानी, लोग घर छोड़कर किराये के मकानों में पहुंचे
बादलों की तड़तड़ाहट ने दी उमस से राहत
उधर, मंगलवार को मौसम ने भी करवट बदली। सुबह से आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों के बीच उमस ने परेशान किया, लेकिन शाम होते-होते बादलों ने गरज-चमक के साथ अपना रंग दिखाया। काशी समेत पूर्वांचल के कई हिस्सों में तेज बौछारों और झमाझम बारिश का दौर चला। बिजली की तड़तड़ाहट के साथ बरसे मेघों ने वातावरण को ठंडा कर दिया। लंबे समय से उमस झेल रहे लोगों ने राहत की सांस ली। बारिश से खेतों को पानी मिला तो शहर की सड़कों और गलियों में भी जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी। सावन के अंतिम दिनों में हुई इस बारिश ने मौसम में मानसूनी रंग फिर गाढ़ा कर दिया।
वरुणा उफनी, सलारपुर में घरों में चार फीट पानी
गंगा के साथ वरुणा नदी के उफान ने सारनाथ क्षेत्र के सलारपुर में हालात मुश्किल कर दिए हैं। सोमवार को वरुणा से जुड़े कई मकानों में करीब चार फीट तक पानी घुस गया। रेलवे लाइन के पास बसे परिवारों को घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। कई लोग पड़ोस में किराये के मकान लेकर रहने लगे हैं। पुराना पुल-पुलकोहना के पास नाले से सटे मकानों की चौखट तक पानी पहुंच गया है। इससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। घरों में पानी घुसने से लोगों के सामने सुरक्षित आवागमन, जरूरी सामान और रहने की व्यवस्था की चुनौती खड़ी हो गई है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
घाटों पर बदली आरती की जगह
गंगा का पानी बढ़ने का असर काशी की धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ने लगा है। अस्सी घाट की आरती अब ‘सुबह-ए-बनारस’ के मंच के पास हो रही है। दशाश्वमेध और राजेंद्र प्रसाद घाट पर भी पानी बढ़ने के कारण आरती स्थल बदल दिया गया है। जिन घाटों की सीढ़ियों पर शाम ढलते ही दीपों की कतारें जगमगाती थीं, वहां अब बढ़ता पानी अपनी सीमा रेखा खींच रहा है। आस्था की लौ जरूर जल रही है, लेकिन उसकी जगह बदल गई है।
मणिकर्णिका में छत पर अंतिम संस्कार
गंगा के बढ़ते पानी ने काशी की सबसे निरंतर चलने वाली परंपरा—अंतिम संस्कार—की व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट पर शवदाह स्थल बदलना पड़ा है। मणिकर्णिका घाट पर पानी काफी ऊपर आने के बाद शवदाह स्थल को छत पर कर दिया गया है। यह दृश्य गंगा के बढ़ते प्रभाव का गंभीर संकेत है। जिस नदी के किनारे जीवन और मृत्यु दोनों की परंपराएं सदियों से साथ-साथ चलती रही हैं, उसकी बढ़ती धारा अब उन व्यवस्थाओं को भी ऊपर खिसकाने पर मजबूर कर रही है।
गंगा-वरुणा की बढ़ती धार पर निगाह
एक ओर आसमान से मेघ बरस रहे हैं, दूसरी ओर गंगा और वरुणा की धार बढ़ रही है। फिलहाल गंगा खतरे के निशान से नीचे है और तत्काल किसी बड़े खतरे का संकेत नहीं है, लेकिन वरुणा के उफान से निचले इलाकों में पैदा हुई स्थिति ने प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी है। काशी में मंगलवार का दिन मौसम और नदियों के दोहरे मिजाज का गवाह बना—आसमान से बरसे मेघों ने उमस धोई, मगर धरती पर चढ़ती गंगा और उफनती वरुणा ने तटवर्ती जीवन की चिंता बढ़ा दी। अब निगाहें अगले कुछ घंटों में बारिश और नदियों की चाल पर टिकी हैं।

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