रक्षा सूत्र भाई के जीवन में विजय और कार्यसिद्धि का मार्ग प्रशस्त करता
इस मौके पर पंडित सुनील पाराशर ने बताया कि विधिपूर्वक बांधा गया रक्षा सूत्र भाई के जीवन में विजय और कार्यसिद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व ही नहीं रक्षा का पर्व है। असुरों के राजा बलि ने अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि के इस पराक्रम को देखकर स्वर्ग के राजा इंद्रदेव घबरा गए और भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे। इंद्र की प्रार्थना स्वीकार कर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। वामन भगवान ने दानवीर बलि से तीन पग भूमि मांगी। अपने पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश नाप लिया। इसके बाद तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं तो राजा बलि ने तीसरा पग अपने सिर पर रखने के लिए कहा। भगवान वामन ने ऐसा ही किया। इस तरह देवताओं की दुविधा समाप्त हो गई और भगवान राजा बलि के दान से प्रसन्न हुए।

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