- भाई की कलाई तक पहुंचने की जल्दी में सड़कों पर जाम, सोशल मीडिया पर रिश्तों की मिठास—GPGT ने झटपट शुभकामनाओं से सजाया डिजिटल संसार
- राखी की डोर में बंधा शहर, सड़कों पर उमड़ा अपनापन; सोशल मीडिया पर बधाइयों का ‘डिजिटल सैलाब’
जहां डाक की रफ्तार थमती थी, वहां मोबाइल ने संभाली बधाई की डोर
रक्षाबंधन ने इस बार एक और बदलती तस्वीर दिखाई। कभी राखी के साथ शुभकामना संदेश पहुंचने में दिन लग जाते थे, अब एक क्लिक में भावनाएं दूसरी दुनिया तक पहुंच रही हैं। सोशल मीडिया सुबह से ही भाई-बहन के प्रेम, बचपन की स्मृतियों और भावुक शुभकामनाओं से भर गया। फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल मंचों पर राखी की आकर्षक तस्वीरें, शुभकामना संदेश और भाई-बहन के रिश्ते की मिठास बयां करती पोस्ट लगातार साझा होती रहीं। किसी ने पुरानी तस्वीर के साथ बचपन की यादें ताजा कीं तो किसी ने दूर रह रही बहन या भाई को डिजिटल संदेश के जरिए अपनेपन का एहसास कराया।
GPGT बना झटपट शुभकामनाओं का नया मंच
इस डिजिटल दौर में GPGT ने भी रक्षाबंधन की बधाइयों को नया अंदाज दिया। आकर्षक डिजाइन और त्योहार के अनुरूप तैयार शुभकामना इमेज ने लोगों को अपनी भावनाएं तुरंत साझा करने का आसान माध्यम दिया। खास बात यह रही कि संदेश सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि तस्वीरों के जरिए भावनाओं को ऐसा रूप मिला कि उन्हें देखते ही त्योहार का रंग महसूस होने लगा। सुबह से देर शाम तक ऐसी शुभकामना तस्वीरें सोशल मीडिया पर लगातार नजर आती रहीं। लोगों ने इन्हें अपने परिचितों, रिश्तेदारों और मित्रों के साथ साझा किया। देखते ही देखते डिजिटल मंच भी रक्षाबंधन के रंग में रंग गए।
एक क्लिक में पहुंची राखी की मिठास
बदलते समय ने रक्षाबंधन का तरीका जरूर बदला है, भावना नहीं। पहले बहनें राखी और मिठाई लेकर भाई के घर पहुंचती थीं, अब दूरी अधिक हो तो वीडियो कॉल, फोटो, संदेश और डिजिटल बधाइयां उस दूरी को पाटने लगी हैं। कई परिवारों में जहां भाई-बहन अलग-अलग शहरों में रहे, वहां मोबाइल स्क्रीन ही मिलन का माध्यम बनी। सोशल मीडिया की टाइमलाइन पर कहीं बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती दिखाई दी तो कहीं भाई बहन को उपहार देते नजर आया। कहीं बचपन की तस्वीरों के साथ रिश्ते की कहानी थी तो कहीं सिर्फ दो पंक्तियों में वह अपनापन था जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है।
बाजार से मोबाइल स्क्रीन तक, हर तरफ रक्षाबंधन
रक्षाबंधन पर काशी में परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चलती दिखाई दी। बाजारों में राखी, मिठाई और उपहारों की खरीदारी ने रौनक बढ़ाई तो सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं ने त्योहार को डिजिटल विस्तार दिया। सड़कों पर भीड़ थी, दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही थी और मोबाइल स्क्रीन पर लगातार नए संदेश दस्तक दे रहे थे। कुल मिलाकर रक्षाबंधन ने एक बार फिर साबित किया कि समय चाहे कितना भी बदल जाए, भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट कम नहीं होती। बदलता है तो सिर्फ उसे व्यक्त करने का तरीका। कभी चिट्ठी में भावनाएं उतरती थीं, फिर फोन आया और अब सोशल मीडिया ने उस रिश्ते को एक क्लिक की दूरी पर ला दिया है। काशी में इस बार राखी सिर्फ कलाई पर नहीं बंधी—वह सड़कों की चहल-पहल, बाजारों की रौनक, घरों की हंसी और मोबाइल स्क्रीन पर चमकती शुभकामनाओं में भी दिखाई दी।

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