- महामंडलेश्वर रामभूषणदास महाराज और संत माधवदास महाराज के सानिध्य में होगा आयोजन, 10 घंटे तक डोल में सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे भगवान
महामंडलेश्वर रामभूषणदास महाराज के सानिध्य में निकलेगा डोल
इस वर्ष भी डोल ग्यारस का भव्य आयोजन महामंडलेश्वर रामभूषणदास महाराज एवं संत माधवदास महाराज के सानिध्य में किया जाएगा। मंदिर परिवार द्वारा आयोजन को लेकर तैयारियां प्रारंभ की जाएंगी। श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर का डोल प्रतिवर्ष दोपहर 12 बजे भगवान श्री नृसिंह को डोल में विराजमान कर नगर भ्रमण के लिए रवाना होता है। डोल के रवाना होने के दौरान जोरदार आतिशबाजी की जाती है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो जाता है।
10 घंटे तक नगर भ्रमण करेंगे भगवान
डोल ग्यारस के अवसर पर डोल लगभग 10 घंटे तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करेगा। इस दौरान मार्ग में श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे और अपनी श्रद्धा अर्पित करेंगे। शहरवासियों के बीच इस डोल को लेकर विशेष उत्साह रहता है। वर्षों से श्रद्धालुओं में डोल के नीचे से निकलने की परंपरा को लेकर भी गहरी आस्था है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए डोल के नीचे से निकलते हैं। श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर का डोल शहर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में अपनी भव्यता के लिए विशेष पहचान रखता है। डोल ग्यारस के दिन श्रद्धालुओं को इस आयोजन का पूरे वर्ष इंतजार रहता है। जैसे ही भगवान श्री नृसिंह डोल में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं, मार्ग में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। भव्य डोल, भगवान का आकर्षक श्रृंगार, आतिशबाजी और भजन-कीर्तन के बीच निकलने वाली शोभायात्रा धार्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना देती है।
भजन मंडलों के साथ निकलेगी भव्य शोभायात्रा
इस वर्ष भी भगवान श्री नृसिंह का डोल भजन मंडलों के साथ नगर भ्रमण करेगा। भजन मंडलों द्वारा भगवान की महिमा का गुणगान किया जाएगा। भक्तिमय भजनों के बीच श्रद्धालु भगवान के दर्शन करेंगे और जगह-जगह उनका स्वागत किया जाएगा। आयोजन को लेकर मंदिर परिवार एवं क्षेत्रवासियों में उत्साह का माहौल है। आने वाले दिनों में डोल ग्यारस की व्यवस्थाओं को लेकर विभिन्न समितियों और कार्यकर्ताओं की बैठकें आयोजित कर जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
लगातार तीसरी बार मिली जिम्मेदारी
डोल ग्यारस आयोजन समिति की जिम्मेदारी लगातार तीसरी बार समाजसेवी दुर्गेश यादव को सर्वसम्मति से दी गई है। बैठक में उपस्थित मंदिर परिवार एवं क्षेत्रवासियों ने उनके कार्यों और आयोजन को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के अनुभव को देखते हुए उन्हें पुन: अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। दुर्गेश यादव ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने पर सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयोजन को सफल बनाने के लिए क्षेत्रवासियों, श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने सभी से मिल-जुलकर डोल ग्यारस के इस धार्मिक आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने में सहयोग करने की अपील की।
बैठक में तैयारियों को लेकर बनी रूपरेखा
आयोजन को लेकर हुई बैठक में डोल ग्यारस की तैयारियों, भजन मंडलों की सहभागिता, नगर भ्रमण के दौरान व्यवस्थाओं तथा श्रद्धालुओं की सुविधा सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। आगामी दिनों में आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। मंदिर परिवार ने क्षेत्रवासियों से डोल ग्यारस के इस पावन पर्व में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर भगवान श्री नृसिंह का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।
आस्था का केंद्र बनेगा शहर
डोल ग्यारस के दिन दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाला भगवान श्री नृसिंह का भव्य नगर भ्रमण देर शाम तक चलेगा। भजन-कीर्तन, आतिशबाजी और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था के बीच निकलने वाला यह डोल एक बार फिर सीहोर की धार्मिक परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश देगा।

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