सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर जारी पांच दिवसीय हरतालिका तीज शिव महापुराण कथा का हुआ विराम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 6 सितंबर 2026

सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर जारी पांच दिवसीय हरतालिका तीज शिव महापुराण कथा का हुआ विराम

  • अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा बोले-अटूट गुरु भक्ति, दृढ़ संकल्प और भगवान शिव पर विश्वास इंसान का भाग्य बदल सकता है; बारह ज्योतिर्लिंगों की महिमा का किया विस्तार से वर्णन

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सीहोर। अटूट गुरु भक्ति, दृढ़ संकल्प और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास मनुष्य के जीवन की दिशा बदल सकता है। यदि व्यक्ति विश्वास के साथ पुरुषार्थ करता है और अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलता है तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आना निश्चित है। भगवान शिव की भक्ति मनुष्य को आत्मबल प्रदान करती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। उक्त विचार अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने जिला मुख्यालय के समीपस्थ कुबेरेश्वरधाम पर जारी ऑनलाइन पांच दिवसीय हरतालिका तीज शिव महापुराण कथा के विराम दिवस पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। कथा के अंतिम दिन उन्होंने हरतालिका तीज व्रत के महत्व सहित भगवान शिव की महिमा से जुड़े अनेक धार्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहाकि शास्त्रों और सनातन परंपरा में मनुष्य जीवन को अत्यंत दुर्लभ माना गया है। लाखों योनियों में मनुष्य योनि ही ऐसी है, जिसमें व्यक्ति भगवान शिव को श्रद्धा के साथ एक लोटा जल अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त करता है। भगवान शिव को जल अर्पित करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। जब मनुष्य सच्चे भाव से महादेव का स्मरण करता है तो उसके भीतर विश्वास और आत्मबल का संचार होता है।


हरतालिका तीज की कथा का किया विस्तार से वर्णन

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कथा के विराम दिवस पर पंडित मिश्रा ने हरतालिका तीज व्रत की महिमा और धार्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को बताया कि दृढ़ संकल्प, तपस्या और अटूट श्रद्धा के माध्यम से मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। हरतालिका तीज केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल्प और भगवान के प्रति विश्वास की परंपरा से जुड़ा हुआ है। व्रत के माध्यम से महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करती हैं तथा परिवार के सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करती हैं।


बारह ज्योतिर्लिंगों की महिमा बताई

रविवार को कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने बारह ज्योतिर्लिंगों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न ज्योतिर्लिंगों की धार्मिक महिमा और भगवान शिव की आराधना में उनके महत्व को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग देशभर में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इसी प्रकार कुबेरेश्वरधाम भी करोड़ों शिव भक्तों की आस्था का केंद्र बन चुका है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और आराधना के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु सच्चे मन से बाबा की आराधना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के साथ यहां आते हैं।


गुरुकुल में सभी शिष्य रहते थे समान

कथा के पांचवें दिवस पंडित मिश्रा ने गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था में सभी शिष्य समान रूप से रहते थे। वहां किसी के बीच ऊंच-नीच या छोटे-बड़े का भेद नहीं होता था। भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसे महान व्यक्तित्वों ने भी गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की और अपने गुरु की आज्ञा का पालन किया।  गुरुकुल में गुरु अपने शिष्यों को शिक्षा के साथ जीवन जीने का संस्कार भी देते थे। गुरु की आज्ञा के अनुसार शिष्य लकड़ी काटकर लाने जैसे कार्य भी करते थे। इससे उन्हें श्रम, अनुशासन, सेवा और आत्मनिर्भरता का महत्व समझ में आता था।


काम की शुरुआत छोटे से करें, मंजिल अवश्य मिलेगी

युवाओं को संदेश देते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जीवन में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। उन्होंने कहा कि कई युवक उनके पास आकर पूछते हैं कि उन्हें जीवन में क्या करना चाहिए। ऐसे युवाओं से वे कहते हैं कि किसी भी कार्य को छोटा समझकर उसे करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि काम की शुरुआत हमेशा छोटे स्तर से होती है और निरंतर मेहनत करते रहने से व्यक्ति बड़ी मंजिल तक पहुंचता है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प, मेहनत और धैर्य जरूरी है। जो व्यक्ति शुरुआत करने से ही डरता है, वह अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकता।


ऑनलाइन कथा से देश-विदेश के श्रद्धालु हुए शामिल

पांच दिवसीय हरतालिका तीज शिव महापुराण कथा का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में देश-विदेश के श्रद्धालु घर बैठे कथा से जुड़े। पांच दिनों तक भगवान शिव की महिमा, हरतालिका तीज व्रत, गुरु भक्ति, कर्म, सेवा और सनातन परंपराओं से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया गया। विराम दिवस पर कथा के समापन के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए धर्म, भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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