लखनऊ : कारीगर से दुनिया तक...कालीन उद्योग को चाहिए अपनी नीति - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

लखनऊ : कारीगर से दुनिया तक...कालीन उद्योग को चाहिए अपनी नीति

  • यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद ने रखा प्रस्ताव, कारीगरों को सस्ती बिजली, कौशल प्रशिक्षण और वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर

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लखनऊ (सुरेश गांधी)। उत्तर प्रदेश के कालीन उद्योग को नई उड़ान देने के लिए अब अलग ‘कालीन नीति’ बनाने की मांग उठी है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर और उपाध्यक्ष असलम महबूब ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष यह मांग रखी। उन्होंने कहा कि समर्पित नीति से प्रदेश के कालीन उद्योग को नीतिगत एवं संस्थागत सहयोग मिलने के साथ निर्यात, रोजगार और कारीगरों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। राउंड-टेबल बैठक में असलम महबूब ने कालीन उद्योग के लिए आधारभूत ढांचे, क्लस्टर विकास, डिजाइन व तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता सुधार, कौशल प्रशिक्षण, विपणन सहायता और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को नीति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि घटते कारीगरों और बुनकरों को रोकने के लिए उनके लिए बेहतर सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना जरूरी है।


दूसरे दिन ‘शिल्प से वैश्विक बाजार तक’ विषयक पैनल चर्चा में भी महबूब ने हस्तनिर्मित कालीन बनाने वाले कारीगरों को निर्धारित दर पर पावरलूम के तहत बिजली उपलब्ध कराने तथा नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए स्किल डेवलपमेंट और डिजाइन ट्रेनिंग की जरूरत बताई। उन्होंने कारीगरों को रोजगार, प्रशिक्षण और बीमा जैसी सुविधाओं से जोड़ने पर भी बल दिया। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई चर्चा में ई-कॉमर्स, जीआई आधारित ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, आधुनिक डिजाइन, बेहतर पैकेजिंग और कॉमन फैसिलिटी सेंटर के जरिए प्रदेश के हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर मंथन हुआ। परिषद ने कहा कि समर्पित कालीन नीति से ‘कारीगर से वैश्विक बाजार’ तक पूरी मूल्य श्रृंखला मजबूत होगी और यूपी की कालीन विरासत को दुनिया में नई पहचान मिलेगी।

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