- कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं, अवांछित व्यवहार पर भी कानून की नजर
- बसैठा विद्यालय में POSH अधिनियम पर जागरूकता कार्यशाला, शिकायत प्रक्रिया की दी गई जानकारी
उन्होंने बताया कि अनुचित स्पर्श, अवांछित शारीरिक निकटता, यौन प्रकृति की टिप्पणियां या संकेत, अशोभनीय संदेश अथवा चित्र भेजना, यौन संबंध या यौन लाभ की मांग करना तथा ऐसा कोई भी अवांछित मौखिक, गैर-मौखिक या लिखित आचरण, जिससे महिला असहज, अपमानित, भयभीत अथवा असुरक्षित महसूस करे, कानून के दायरे में आ सकता है। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न की रोकथाम के लिए कानून की जानकारी के साथ-साथ संस्थागत संवेदनशीलता एवं जवाबदेही भी आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों एवं कर्मियों से अपील की कि वे अपने संस्थान में सम्मानजनक व्यवहार एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यशाला में लैंगिक विशेषज्ञ शिवराम मेहरा ने POSH अधिनियम के अंतर्गत शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, शिकायतों के निवारण की व्यवस्था, संस्था एवं नियोक्ता की जिम्मेदारियों तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को अनुचित व्यवहार की स्थिति में निर्धारित कानूनी एवं संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से समाधान सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक काशफूददूजा एवं कृष्ण कुमार झा, रामचन्द्र राम, अभिलाषा राजभर, विश्वनाथ प्रसाद, सुरेश कुमार भगत, सत्यवीर सिंह, सत्येन्द्र कुमार, रामबाबू कुमार, जितेंद्र पासवान, संतोष मण्डल, शिल्पी कुमारी, सबाना परवीन, सुषमा कुमारी, राजकुमारी एवं संगम कुमारी पांडेय सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। इस दौरान प्रतिभागियों ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों एवं उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका जिला मिशन समन्वयक अंजनी कुमार झा एवं लैंगिक विशेषज्ञ शिवराम मेहरा द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया।

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