वाराणसी : गंगा के ऊपर शौर्य का शिखर, पीएम मोदी ने देखा वायुसेना का विराट प्रदर्शन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 25 अक्टूबर 2026

वाराणसी : गंगा के ऊपर शौर्य का शिखर, पीएम मोदी ने देखा वायुसेना का विराट प्रदर्शन

  • राफेल, सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा काशी का आसमान, सूर्यकिरण और सारंग के हैरतअंगेज करतबों ने मोहा मन
  • नमो घाट पर वायुसेना दिवस की 94वीं वर्षगांठ का भव्य समापन, प्रधानमंत्री के स्वागत में गूंजे ‘हर हर महादेव’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष
  • गंगा के दोनों किनारों पर उमड़ा जनसमुद्र, 15 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का अनुमान, तेजस-सुखोई की कलाबाजी देख बरबस गूंजे भारत माता की जय और वंदेमातरम के नारे

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। गंगा की लहरें अपनी गति से बह रही थीं। घाटों पर आस्था का सैलाब था और सामने विस्तृत आकाश में भारतीय वायुसेना के पराक्रम की नई इबारत लिखी जा रही थी। तभी लड़ाकू विमानों की गर्जना ने काशी के वातावरण में रोमांच भर दिया। राफेल, सुखोई और स्वदेशी तेजस की तेज उड़ानों के बीच कभी हेलीकॉप्टरों की सधी हुई चाल दिखाई दी तो कभी सूर्यकिरण के विमानों ने आकाश में अद्भुत आकृतियां उकेरीं। गंगा के ऊपर यह केवल हवाई करतबों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की सामरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और वायुयोद्धाओं के अदम्य साहस का सजीव परिचय था। अवसर था भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का, जिसे रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नमो घाट पर देखा। काशी में तीन दिनों तक चले इस भव्य हवाई प्रदर्शन का रविवार को समापन हुआ। प्रधानमंत्री के आगमन ने आयोजन को विशेष महत्त्व दिया। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। आसमान में वायुसेना का शौर्य और घाटों पर उमड़ा जनसमुदाय मिलकर ऐसा दृश्य रच रहे थे, जिसमें राष्ट्रीय गौरव और काशी की सांस्कृतिक चेतना एक साथ दिखाई दे रही थी।


आसमान में स्वदेशी ताकत, सटीक उड़ान और अद्भुत तालमेल

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एयर शो में लड़ाकू विमानों की रफ्तार, संतुलन और आकाश में दिशा बदलने की क्षमता ने दर्शकों को रोमांचित किया। राफेल की गर्जना, सुखोई-30 एमकेआई की दमदार उड़ान और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के प्रदर्शन ने भारतीय वायुसेना की विविध क्षमताओं को सामने रखा। प्रचंड हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ने भी अपनी परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया। अन्य विमानों और हेलीकॉप्टरों की भागीदारी ने इस आयोजन को और व्यापक बनाया। सबसे आकर्षक दृश्यों में सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का प्रदर्शन शामिल रहा। लाल-सफेद विमानों की एक साथ उड़ान, एक-दूसरे के बेहद करीब रहते हुए दिशा बदलना और हवा में सटीक तालमेल के साथ करतब दिखाना पायलटों के असाधारण कौशल का प्रमाण था। कुछ क्षणों के लिए दर्शकों की निगाहें आसमान पर ठहर गईं। विमानों की गति इतनी तेज थी कि उनकी आकृतियां देखते ही देखते बदल जातीं, लेकिन हर अगली उड़ान पहले से अधिक रोमांच पैदा करती। सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने भी अपने सधे हुए करतबों से दर्शकों का ध्यान खींचा। हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित गति और अनुशासित संरचनाओं ने दिखाया कि वायुसेना की ताकत केवल लड़ाकू विमानों की रफ्तार तक सीमित नहीं है। कम गति पर नियंत्रित उड़ान और सीमित अंतर में सटीक संचालन के लिए भी उच्चस्तरीय प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क की जरूरत होती है। किरण विमानों ने ‘वी’ आकार में उड़ान भरकर आकाश में तिरंगे के रंगों का दृश्य रचा, जबकि एमआई-17 हेलीकॉप्टरों की ओंकार संरचना और राष्ट्रीय ध्वज के साथ उड़ान ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इन प्रस्तुतियों में रोमांच के साथ राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान का भाव भी शामिल था। हर करतब के बाद घाटों पर तालियों और जयघोष की गूंज सुनाई देती रही।


गंगा के दोनों किनारों पर उमड़ा जनसैलाब

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नमो घाट से लेकर आसपास के गंगा घाटों तक लोगों की निगाहें आसमान पर टिकी थीं। गंगा के उस पार रेती पर भी बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। दूर-दूर तक फैले जनसमूह के बीच कोई मोबाइल कैमरे में विमानों की उड़ान कैद कर रहा था तो कोई बच्चों को आसमान में दिखाई दे रहे विमानों की पहचान बता रहा था। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर उम्र के लोगों में प्रदर्शन को लेकर उत्सुकता दिखाई दी। काशी के लिए यह आयोजन इसलिए भी खास रहा कि गंगा की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में आधुनिक सैन्य विमानन का ऐसा विराट प्रदर्शन देखने को मिला। जिन घाटों पर सामान्य दिनों में घंटियों, शंखध्वनि, आरती और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती है, वहां इस बार लड़ाकू विमानों की गर्जना ने एक अलग ही वातावरण बना दिया। गंगा की धारा के ऊपर से गुजरते विमानों की छाया और उनके पीछे बनती धुएं की लकीरें दृश्य को यादगार बना रही थीं। यहां आस्था और आधुनिक तकनीक के बीच कोई विरोध नहीं, बल्कि एक अनूठा संगम दिखाई दिया। एक ओर सनातन परंपरा की प्रतीक काशी और दूसरी ओर देश की रक्षा में जुटे वायुयोद्धाओं का कौशल। दोनों ने मिलकर आयोजन को केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे राष्ट्रीय गौरव के उत्सव में बदल दिया।


अपने सांसद के स्वागत में सड़कों पर उतरी काशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे तो उनका स्वागत भी काशी की परंपरा और राजनीतिक उत्साह के अनुरूप हुआ। बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से हेलीकॉप्टर द्वारा मिर्जामुराद क्षेत्र के खोचवां पहुंचे प्रधानमंत्री ने सबसे पहले अरविंद लिमिटेड की नई परिधान विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया। यहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं महिला कर्मियों से संवाद किया। इसके बाद वह हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन पहुंचे और वहां से सड़क मार्ग से नमो घाट के लिए रवाना हुए। पुलिस लाइन से नमो घाट तक रास्ते में कई प्रमुख स्थानों पर लोगों ने उनका स्वागत किया। सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने ‘मोदी-मोदी’, ‘हर हर महादेव’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया। प्रधानमंत्री ने भी अपने वाहन से बाहर निकलकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। कई स्थानों पर फूलों की वर्षा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री के नमो घाट पहुंचने पर भी जनसमुदाय का उत्साह साफ दिखाई दिया। एयर शो के दौरान उनके आसपास मौजूद लोगों के साथ ही दूसरे घाटों पर जुटे दर्शकों में भी आयोजन को लेकर खास उत्सुकता रही। अपने सांसद को अपने बीच पाकर काशीवासियों का उत्साह और आसमान में वायुसेना के विमानों का प्रदर्शन, दोनों एक-दूसरे के साथ चलते दिखाई दिए।


महिला रोजगार से लेकर वायुसेना के पराक्रम तक

प्रधानमंत्री की इस यात्रा का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव खोचवां में अरविंद लिमिटेड की नई विनिर्माण इकाई का उद्घाटन भी रहा। लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परिधान निर्माण संयंत्र को क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। यहां प्रशिक्षण ले रहीं लगभग 300 महिलाओं से प्रधानमंत्री का संवाद महिला भागीदारी और कौशल विकास के संदेश को सामने लाया। एक ही दिन में काशी ने विकास और सामरिक शक्ति के दो अलग-अलग लेकिन महत्त्वपूर्ण पक्ष देखे। खोचवां में आधुनिक विनिर्माण और महिला रोजगार की संभावनाएं थीं तो नमो घाट पर देश की वायुशक्ति का प्रदर्शन। एक ओर उद्योग के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश, दूसरी ओर आसमान में भारत की रक्षा क्षमता और तकनीकी सामर्थ्य का परिचय।


काशी के आसमान से देश को संदेश

‘विंग्स ओवर गंगा’ का महत्त्व इस बात में भी है कि वायुसेना का प्रदर्शन राजधानी या किसी सैन्य प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रहा। देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े शहर में इसे आम लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया। इससे नागरिकों को वायुसेना के प्रशिक्षण, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और परिचालन क्षमता को करीब से देखने का अवसर मिला। वायुसेना की ताकत केवल विमानों की गति या उनकी मारक क्षमता में नहीं, बल्कि उन वायुयोद्धाओं के धैर्य, निर्णय क्षमता और कठिन परिस्थितियों में सटीक कार्रवाई करने के प्रशिक्षण में भी निहित है। हवा में कुछ सेकंड के भीतर दिशा बदलते विमान और एक-दूसरे के साथ असाधारण तालमेल बिठाते हेलीकॉप्टर इसी कठोर प्रशिक्षण की झलक पेश कर रहे थे। गंगा के ऊपर से गुजरते विमानों की गर्जना देर तक लोगों की स्मृतियों में बनी रहने वाली थी। काशी ने इन तीन दिनों में आस्था के अपने परिचित परिवेश के बीच आधुनिक भारत की हवाई ताकत को देखा। रविवार का आयोजन इसी अनुभव का सबसे बड़ा पड़ाव बना, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में वायुसेना के जांबाजों ने नमो घाट के आसमान को अपने पराक्रम का मंच बना दिया।


84 घाट बने दर्शक दीर्घा, उस पार रेती पर भी जनसैलाब

. काशी के गंगा घाट रविवार को किसी विशाल प्राकृतिक स्टेडियम में तब्दील हो गए। नमो घाट से लेकर गंगा के 84 घाटों तक दर्शकों की भीड़ ऐसी उमड़ी कि घाटों पर तिल रखने की जगह नहीं बची। गंगा के उस पार रेती पर भी कुछ ऐसा ही नजारा रहा। दूर-दूर तक लोगों का हुजूम दिखाई दे रहा था। हर किसी की निगाहें आसमान पर थीं और मोबाइल कैमरे इस ऐतिहासिक पल को कैद करने में जुटे थे। एक अनुमान के मुताबिक, गंगा के दोनों किनारों पर 15 लाख से अधिक लोग एयर शो देखने पहुंचे। घाटों की सीढ़ियों से लेकर खुले स्थानों और रेती तक लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को विराट जनउत्सव का रूप दे दिया। काशी ने अपने घाटों को पहली बार इस तरह की हवाई कलाबाजियों के लिए विशाल दर्शक दीर्घा बनते देखा।


करतब आसमान में, जयघोष घाटों पर

जैसे ही तेजस, राफेल, सुखोई और सूर्यकिरण के विमानों ने गंगा के ऊपर अपने करतब दिखाए, घाटों पर मौजूद लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। कोई ‘भारत माता की जय’ तो कोई ‘वंदेमातरम’ और ‘हर हर महादेव’ का उद्घोष करने लगा। विमानों की तेज गति और पलभर में दिशा बदलने की क्षमता ने लोगों को हैरत में डाल दिया। कई दर्शक रोमांचित होकर कह उठे कि तेजस और सुखोई जिस तेजी से हवा में मुड़ जाते हैं, उतनी तेजी से तो वे अपनी बाइक या साइकिल भी नहीं मोड़ पाते! हर रोमांचक करतब के साथ तालियां गूंजतीं और अगले ही पल आसमान की ओर से नजरें हटाए बिना जयघोष शुरू हो जाता। यह दृश्य बता रहा था कि वायुसेना का प्रदर्शन लोगों के लिए महज हवाई करतब नहीं, बल्कि देश की ताकत और अपने जांबाजों के प्रति गर्व का अवसर बन गया था।


जब वायुसेना प्रमुख ने थामा लोगों का मोबाइल

नमो घाट पर एयर शो शुरू होने से पहले भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने दर्शकों के बीच पहुंचकर आयोजन का एक अलग ही मानवीय पक्ष सामने रखा। वह अलग-अलग जोन में गए और वहां मौजूद लोगों से आमने-सामने मुलाकात की। लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और कई मौकों पर खुद ही मोबाइल लेकर सेल्फी ली। तस्वीर खींचने के बाद मोबाइल संबंधित व्यक्ति को वापस भी कर दिया। देश की वायुशक्ति का नेतृत्व करने वाले शीर्ष अधिकारी को इस तरह आम दर्शकों के बीच सहजता से घुलते-मिलते देख लोग उत्साहित हो उठे। जिन लोगों के लिए लड़ाकू विमानों के जांबाज पायलट और वायुसेना के शीर्ष अधिकारी आम तौर पर दूर से देखने वाली हस्तियां होते हैं, उनके लिए यह आत्मीय मुलाकात यादगार बन गई। आसमान में अनुशासन और कौशल का प्रदर्शन करने वाली वायुसेना का यह सहज, आत्मीय चेहरा भी लोगों के दिलों में जगह बना गया।

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