लखनऊ से गूँजा मोहब्बत, इंसानियत और राष्ट्रीय एकता का पैगाम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 18 अक्टूबर 2026

लखनऊ से गूँजा मोहब्बत, इंसानियत और राष्ट्रीय एकता का पैगाम

  • मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने दिया ‘नेक बनो, एक बनो’ का संदेश

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लखनऊ, 18 अक्टूबर (रजनीश के झा)। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, उत्तर प्रदेश द्वारा रविवार को लखनऊ के विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण को मजबूत करने का संदेश दिया गया। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं, धर्मगुरुओं, सामाजिक प्रतिनिधियों और महिलाओं ने भाग लिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता, सांस्कृतिक विरासत और आपसी भाईचारे में निहित है। समाज में नफरत, हिंसा और कट्टरता के स्थान पर प्रेम, संवाद और इंसानियत को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ता की जुबान में मिठास हो, चेहरे पर नूर हो और मन में दूसरों की सहायता करने की भावना हो।” उन्होंने लखनऊ से मोहब्बत का संदेश देते हुए कहा, “लखनऊ से पैगाम आया है—मोहब्बत, मोहब्बत, मोहब्बत।” उन्होंने कहा कि इसकी गूँज लाहौर और ढाका तक पहुँचनी चाहिए।


युद्ध नहीं, शांति; तलाक नहीं, सुलह का संदेश: डॉ. इंद्रेश कुमार

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अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि युद्ध और हिंसा किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम न अमेरिका के अमेरिकन हैं, न ईरान के ईरानी और न इज़राइल के इज़राइली। हम भारत के भारतीय हैं।” उन्होंने सभी देशों से शांति और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की। पारिवारिक एकता और महिलाओं के सम्मान पर जोर देते हुए उन्होंने मंच के संदेश ‘तलाक नहीं, सुलह; तलाक नहीं, मोहब्बत’ को दोहराया। उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवादों का समाधान आपसी सम्मान, समझदारी और संवाद से निकालने का प्रयास होना चाहिए। नशे और घरेलू हिंसा से दूर रहकर परिवारों में प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है।


‘तालीम, तहज़ीब और तरक्की’ से ही बनेगा सशक्त समाज और विकसित भारत: प्रो. डॉ. शाहिद अख्तर

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. डॉ. शाहिद अख्तर के संबोधन में शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के महत्व को प्रमुखता दी गई। उन्होंने मुस्लिम समाज की प्रगति के लिए ‘तालीम, तहज़ीब और तरक्की’ को महत्वपूर्ण आधार बताया। शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर इंसान, जिम्मेदार नागरिक और सशक्त राष्ट्र के निर्माण की बुनियाद है। उन्होंने कहा,  “मुस्लिम समाज की वास्तविक तरक्की का रास्ता तालीम, तहज़ीब और तरक्की से होकर गुजरता है। तालीम हमें इल्म और हुनर देती है, तहज़ीब हमें इंसानियत, अदब, अखलाक और दूसरों के प्रति सम्मान करना सिखाती है, जबकि तरक्की हमें आत्मनिर्भर बनाकर समाज और मुल्क की खुशहाली में भागीदार बनाती है। हमें अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ आधुनिक विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, अनुसंधान और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ना होगा। बेटियों की शिक्षा और युवाओं का कौशल विकास भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने पवित्र कुरान के पहले संदेश ‘इक़रा’ अर्थात ‘पढ़ो’ का उल्लेख करते हुए ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही कुरान की सूरह अल-फातिहा में प्रयुक्त ‘रब्बुल आलमीन’ और भारतीय संस्कृति के संदेश ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ही विचार संपूर्ण मानवता के सुख, सम्मान और कल्याण की भावना व्यक्त करते हैं।“हमारी धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय पहचान एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं। एक अच्छा मुसलमान होने के साथ एक जिम्मेदार हिंदुस्तानी बनना भी हमारा कर्तव्य है। हमें नफरत और कट्टरता के बजाय मोहब्बत, संवाद और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का प्रयास समाज को शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना है। हमारा संकल्प होना चाहिए—हर घर तक तालीम, हर दिल में तहज़ीब और हर परिवार तक तरक्की। जब समाज शिक्षित, संस्कारित और आत्मनिर्भर बनेगा, तभी समरस, सशक्त और विकसित भारत का सपना साकार होगा।”


‘आधी रोटी खाएंगे, बच्चों को पढ़ाएंगे’—शिक्षा और राष्ट्रप्रेम पर जोर

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संगठन संयोजक गिरीश जुयाल ने मंच के लगभग 25 वर्षों के सामाजिक प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा, नैतिक मूल्य और राष्ट्रप्रेम संगठन की प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं। उन्होंने ‘आधी रोटी खाएंगे, बच्चों को पढ़ाएंगे’ का संदेश दोहराते हुए कहा कि हर व्यक्ति अपनी धार्मिक आस्था का पालन करते हुए एक अच्छा, सच्चा और नेक हिंदुस्तानी बने। इस्लामी विद्वान मौलाना सैयद कौकब मुजतबा ने कहा कि राष्ट्रवाद अपने वतन से मोहब्बत और उसके प्रति जिम्मेदारी का नाम है। इस्लाम अमन, इंसानियत और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है। जमीअत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष क़ारी अबरार जमाल ने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने विभिन्न मसलकों और विचारधाराओं के मुसलमानों को एक साझा मंच प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम का वास्तविक संदेश अमन, मोहब्बत और इंसानियत है तथा कट्टरता और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाली सोच से बचना आवश्यक है।


महिला सशक्तिकरण और धार्मिक सद्भाव पर जोर: डॉ. शालिनी अली

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शालिनी अली ने कहा कि महिलाएँ सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उन्होंने लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब को आपसी सम्मान और भाईचारे का प्रतीक बताते हुए महिलाओं से शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकता का संदेश घर-घर पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “ज़मीन पर घर बनाया है, पर जन्नत में रहती हूँ मैं, फख्र से कहती हूँ, हिंदुस्तानी मुसलमान हूँ मैं।” सैयद रज़ा हुसैन रिज़वी ने धार्मिक स्वतंत्रता, सहअस्तित्व और शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पवित्र कुरान का पहला संदेश ‘इक़रा’ अर्थात ‘पढ़ो’ ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी समुदायों के बीच आपसी सम्मान और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।


इंसानियत और राष्ट्रसेवा ही मंच की पहचान: मोहम्मद अफज़ाल

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफज़ाल ने कहा कि मंच का उद्देश्य जिम्मेदार, जागरूक और समर्पित कार्यकर्ताओं को तैयार करना है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बन सकें। उन्होंने कहा, “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच कोई राजनीतिक दल नहीं है और न ही इसका कोई चुनाव चिह्न है। हमारी सबसे बड़ी पहचान इंसानियत है और हमारा सबसे बड़ा उद्देश्य समाज को जोड़ना है।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से नई ऊर्जा और संकल्प के साथ शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।


‘नेक बनो, एक बनो’ के संकल्प के साथ सम्मेलन संपन्न

सम्मेलन में वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक संवाद, धार्मिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक विश्वास, नैतिक मूल्यों और नागरिक जिम्मेदारी को मजबूत करना भी आवश्यक है। सम्मेलन का समापन ‘नेक बनो, एक बनो’, ‘आधी रोटी खाएंगे, बच्चों को पढ़ाएंगे’ और ‘नफरत नहीं, मोहब्बत; टकराव नहीं, संवाद; युद्ध नहीं, शांति’ के संदेश के साथ हुआ।

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