अपना नजरिया साझा करते हुए कुमार कहते हैं, “श्री नंदन नीलेकणि जी मेरे लिए अत्यंत आदरणीय हैं। यह मेरा सौभाग्य रहा है कि उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक इमेजिनिंग इंडिया: द आइडिया ऑफ रिन्यूड नेशन में मेरे और मेरे प्रयास सुपर 30 की प्रशंसा की है। उनके प्रति मेरे मन में हमेशा गहरा सम्मान रहा है।लेकिन हाल ही में NEET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए अंतिम समय में AI की मदद लेने का जो सुझाव उन्होंने दिया है, उससे मैं विनम्रतापूर्वक असहमत हूँ। मेरी असहमति के पीछे तीन महत्वपूर्ण कारण हैं।
पहला, पेपर लीक रोकना बेहद जरूरी है, लेकिन इसके लिए पूरी परीक्षा व्यवस्था को कंप्यूटर आधारित बना देना कितना उचित होगा? हमारे देश के दूरदराज के गाँवों और गरीब परिवारों में आज भी लाखों ऐसे प्रतिभाशाली बच्चे हैं, जिनकी कंप्यूटर तक पर्याप्त पहुँच नहीं है। कहीं ऐसा न हो कि नकल रोकने की कोशिश में हम उन बच्चों के सामने एक नई बाधा खड़ी कर दें।
दूसरा, अगर सुदूरवर्ती इलाके में कोई टेस्ट लेने के लिए सेंटर भी होगा तब वहां क्या उपलब्ध सुविधा और सुरक्षा मेट्रो सिटी के सेंटर जैसी होगी?
तीसरा, यह बड़ी आम बात होती हैं कि विभिन्न परीक्षाओं के लिए बनाए गए सवाल में लगभग हर वर्ष गलतियाँ निकल जातीं हैं जबकि सवालों की संख्या बहुत कम होती है | अब जब हजारों सवालों का क्वेश्चन बैंक बनाया जाएगा जिससे AI लास्ट मिनिट में क्वेश्चन सलेक्ट करेगा, तब क्या गारंटी है कि सभी सवाल सही हों।
मैं तकनीक या AI का विरोधी नहीं हूँ। बल्कि मेरा मानना है कि AI शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। प्रश्नपत्र बनाने में भी यह विशेषज्ञों की सहायता कर सकता है। लेकिन सहायता करने और अंतिम निर्णय लेने में बहुत बड़ा अंतर है। पिछले कई दशकों से विद्यार्थियों के साथ काम करने और AI की संभावनाओं को समझने के अपने अनुभव के आधार पर मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा - पेपर लीक रोकने के लिए हमें व्यवस्था की कमजोरियाँ दूर करनी चाहिए, न कि ऐसी नई व्यवस्था बना देनी चाहिए जिसमें गरीब और प्रतिभाशाली बच्चों के लिए अवसर और कठिन हो जाएँ। क्योंकि परीक्षा का असली उद्देश्य तकनीक की ताकत दिखाना नहीं, बल्कि देश के हर कोने में छिपी प्रतिभा को पहचानना है। और हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि एक गलती का नुकसान सिर्फ कुछ अंक नहीं, किसी बच्चे का पूरा सपना भी हो सकता है।" आनंद कुमार की बातों से यह साफ है कि पढ़ाई तक पहुंच में और असमानता को पैदा किए बिना एक्जामिनेशन की सिक्योरिटी को सबसे पहले मज़बूत किए जाने की जरूरत है। हालांकि AI की मदद क्वेश्चन पेपर तैयार किए जाने में एक्सपर्ट्स द्वारा ली जा सकती है। ऐसे में उनका यह मानना है कि किसी भी नए बदलाव में सही नतीजे, एक जैसा एग्जामिनेशन स्टैंडर्ड और सभी छात्रों को एक जैसा मौका मिलना सबसे अहम है।

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