- बेंगलूरु में सीआईआई एयरोडेफ टेक समिट संपन्न
बीईएमएल लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, शांतनु रॉय ने कहा कि “भारत अब सिर्फ भावी रक्षा की तैयारी नहीं कर रहा है, बल्कि उसे आकार देना शुरू कर रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र के बदलाव को स्केल, स्पीड और बढ़ते वैश्विक वजूद वाला बताया, जिसमें निर्यात एक ढांचागत बदलाव का संकेत दे रहा है। भारत को “मेक इन इंडिया” से आगे बढ़कर “इंडिया में डिज़ाइन, इंडिया में डेवलप और इंडिया से एक्सपोर्ट” की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें कंपनियाँ टेक्नोलॉजी की प्रवर्तक और एक्सपोर्टर बनें।” बीईएमएल की कोशिशों पर रोशनी डालते हुए, उन्होंने कहा कि इसका फ्यूचरिस्टिक प्रोडक्ट इनोवेशन इनक्यूबेशन टेक्नोलॉजी सेंटर अगली पीढ़ी के "आर्मर्ड और कॉम्बैट व्हीकल" तथा कंपनी 280 किलोमीटर प्रति किलोमीटर हाई-स्पीड ट्रेन के डिज़ाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग में मदद कर रही है। उन्होंने लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के संदर्भ में बीईएमएल की पहल का भी जिक्र किया। शोध कार्य, निवेश, मज़बूत सप्लाई चेन और सब-कंपोनेंट्स तक की विकास गाथा की उन्होने बात कही। डसॉल्ट सिस्टम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीनियर डायरेक्टर, प्रवीण मैसूरु ने कहा कि डिजिटल इंजीनियरिंग, थ्रीडी मॉडल, सिमुलेशन और वर्चुअल ट्विन टेक्नोलॉजी प्रोटोटाइपिंग से पहले डिज़ाइन को सत्यापित कर सकती हैं, विकास चक्र को छोटा कर सकती हैं और मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी को बेहतर बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि एआई इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं है, बल्कि उनकी क्षमताओं को बढ़ाने और इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस में प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए है। निखिल मल्लावरापु ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो 15% से ज़्यादा था, और डिफेंस एक्सपोर्ट ₹38,424 करोड़ था। उन्होंने उधमियों से पार्टनरशिप, डिज़ाइन ओनरशिप को मज़बूत सप्लाई चेन में बदलने की अपील की।

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