बेंगलुरु : तकनीक से परे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक रक्षा उत्पाद बनाने के लिए नवाचार जरुरी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

बेंगलुरु : तकनीक से परे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक रक्षा उत्पाद बनाने के लिए नवाचार जरुरी

  • बेंगलूरु में सीआईआई एयरोडेफ टेक समिट संपन्न 

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बेंगलुरु, 15 अक्टूबर, (विजय सिंह) । भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बेल) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, मनोज जैन ने भारतीय उद्योग परिसंघ के तत्वावधान में कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरु में संपन्न एयरोडेफ टेक समिट 2026 के तीसरे संस्करण के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक उत्पाद बनाने के लिए तकनीक के साथ-साथ नवाचार की भी ज़रूरत है। “आत्मनिर्भर भारत के लिए टेक्नोलॉजी-ड्रिवन एयरोस्पेस और डिफ़ेंस इकोसिस्टम” थीम के तहत हुए इस इवेंट में सेना, रक्षा उद्योग, स्टार्ट-अप और शैक्षणिक प्रतिनिधियों के समागम में बोलते हुए उन्होंने कहा, “आजकल सिर्फ़ टेक्नोलॉजी काफ़ी नहीं है।” क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के तीन स्तंभ बताते हुए, उन्होंने "कॉस्ट-इफेक्टिव डिफेंस सॉल्यूशन"  बनाने के लिए एआई और दूसरी तकनीकों में एक नवाचार परत की जरूरत बताया। उन्होंने रक्षा, निजी प्रतिष्ठानों, इवेट कंपनियों, स्टार्ट-अप और शैक्षिक स्तरों के बीच और नजदीकी सहयोग की अपील की। साझा परियोजनाओं में आने वाली मुश्किलों को माना और एकेडमिक रिसर्च को प्रोडक्ट्स में बदलने के साथ-साथ एक्सपोर्ट-वर्थ सिस्टम्स के लिए रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नेटवर्किंग, ऑप्टिक्स, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को इंटीग्रेट करना ज़रूरी बताया।


बीईएमएल लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, शांतनु रॉय ने कहा कि “भारत अब सिर्फ भावी रक्षा की तैयारी नहीं कर रहा है, बल्कि उसे आकार देना शुरू कर रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र के बदलाव को स्केल, स्पीड और बढ़ते वैश्विक वजूद वाला बताया, जिसमें निर्यात एक ढांचागत बदलाव का संकेत दे रहा है। भारत को “मेक इन इंडिया” से आगे बढ़कर “इंडिया में डिज़ाइन, इंडिया में डेवलप और इंडिया से एक्सपोर्ट” की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें कंपनियाँ टेक्नोलॉजी की प्रवर्तक और एक्सपोर्टर बनें।” बीईएमएल की कोशिशों पर रोशनी डालते हुए, उन्होंने कहा कि इसका फ्यूचरिस्टिक प्रोडक्ट इनोवेशन इनक्यूबेशन टेक्नोलॉजी सेंटर अगली पीढ़ी के "आर्मर्ड और कॉम्बैट व्हीकल" तथा कंपनी  280 किलोमीटर प्रति किलोमीटर हाई-स्पीड ट्रेन के डिज़ाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग में मदद कर रही है। उन्होंने लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के संदर्भ में बीईएमएल की पहल का भी जिक्र किया। शोध कार्य, निवेश, मज़बूत सप्लाई चेन और सब-कंपोनेंट्स तक की विकास गाथा की उन्होने बात कही। डसॉल्ट सिस्टम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीनियर डायरेक्टर, प्रवीण मैसूरु ने कहा कि डिजिटल इंजीनियरिंग, थ्रीडी मॉडल, सिमुलेशन और वर्चुअल ट्विन टेक्नोलॉजी प्रोटोटाइपिंग से पहले डिज़ाइन को सत्यापित कर सकती हैं, विकास चक्र को छोटा कर सकती हैं और मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी को बेहतर बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि एआई इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं है, बल्कि उनकी क्षमताओं को बढ़ाने और इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस में प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए है। निखिल मल्लावरापु ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो 15% से ज़्यादा था, और डिफेंस एक्सपोर्ट ₹38,424 करोड़ था। उन्होंने उधमियों से पार्टनरशिप, डिज़ाइन ओनरशिप को मज़बूत सप्लाई चेन में बदलने की अपील की।

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