डीसीपी ने कहा, "जिन पुरुष प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर छोड़ दिया गया। इससे इतर किया गया कोई भी दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता है।” पुलिस की यह प्रतिक्रिया पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर और उसके आसपास छात्र समूहों, राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं द्वारा निर्वाचन आयोग के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कवायद में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के संबंध किए गए विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला के बीच आई है। आईसा के सदस्यों ने इससे पहले आरोप लगाया था कि उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को जंतर-मंतर की ओर विरोध मार्च करने के दौरान हिरासत में लिया गया और नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने ले जाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि उन्हें एक निजी वाहन में ले जाया गया और वाहन में कोई महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं थी। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया और उन्हें दांत से काट लिया। नयी दिल्ली जिले में प्रतिबंधों और भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारियों द्वारा जंतर-मंतर तक पहुंचने की कोशिश के कारण लोगों को बार-बार हिरासत में लिए जाने की घटनाएं देखी गई हैं। पुलिस ने साफ किया कि हिरासत की कार्रवाई कानून के मुताबिक की गई और विरोध स्थलों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने निर्धारित नियमों का पालन किया।
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में हाल में हुए प्रदर्शनों के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के आरोपों को सोमवार को खारिज कर दिया। पुलिस ने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों से महिला कर्मियों ने निपटा और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार सम्मानपूर्वक व्यवहार किया गया। नयी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने कहा कि ये आरोप "निराधार और भ्रामक" हैं तथा घटनाओं के वास्तविक क्रम को नहीं दर्शाते हैं। शर्मा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "कुछ सोशल मीडिया हैंडल दावा कर रहे हैं कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई। ये आरोप निराधार और भ्रामक हैं। महिला प्रदर्शनकारियों से महिला कर्मियों द्वारा निपटा जाता है तथा उनके साथ सम्मान के साथ व्यवहार किया जाता है।" उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना और छोड़ना, यह सबकुछ कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया गया।

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