दिल्ली : आरटीआई के 21 साल, 3.85 लाख मामले लंबित, लौटाई गई अपील में प्रक्रियागत अड़चनों पर चिंता - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

दिल्ली : आरटीआई के 21 साल, 3.85 लाख मामले लंबित, लौटाई गई अपील में प्रक्रियागत अड़चनों पर चिंता

Rti-history
नई दिल्ली। इस साल 30 जून तक 28 सूचना आयोगों में कुल 3.85 लाख अपील और शिकायतें लंबित थीं, जबकि बिना आदेश जारी किए भी कई मामले वापस कर दिए गए। पारदर्शिता पर नजर रखने वाली एक संस्था की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। बारह अक्टूबर को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के 21 वर्ष पूरे होने के मौके पर सतर्क नागरिक संगठन (एसएनएस) की रिपोर्ट में कहा गया कि नौ सूचना आयोगों ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच बिना कोई आदेश पारित किए 37,701 मामले वापस कर दिए। यह आंकड़ा केवल उन नौ आयोगों का है, जिन्होंने इस संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में सबसे अधिक 14,603 मामले लौटाए गए। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग में 14,140, बिहार में 4,417 और गुजरात में 3,276 मामले लौटाए गए। पांच सूचना आयोगों ने लौटाई गई अपील और शिकायतों की संख्या से संबंधित आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए। 


एसएनएस की संस्थापक अंजलि भारद्वाज ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि केंद्र और कुछ राज्य सरकारों ने दूसरी अपील दायर करने के लिए निर्धारित प्रारूप तय किए हैं तथा सूचना आयोग उन मामलों को लौटा देते हैं, जो इन प्रारूपों के अनुरूप नहीं होते। उन्होंने दावा किया कि कुछ अपील को पृष्ठ संख्या न होने जैसी छोटी-मोटी कमियों के कारण भी लौटा दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘आयोग को लोगों के सूचना के अधिकार को सुगम बनाना चाहिए, न कि जानकारी हासिल करने में अनावश्यक नौकरशाही अड़चनें पैदा करनी चाहिए।’’  रिपोर्ट के अनुसार, समीक्षा अवधि के दौरान केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में 31,179 मामले दर्ज किए गए, जबकि 14,603 मामले लौटा दिए गए। इसमें पहले के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि सीआईसी द्वारा लौटाई गई करीब 95 प्रतिशत अपील दोबारा दायर नहीं की गईं। एसएनएस से जुड़ी अमृता जौहरी ने कहा कि गरीब और वंचित समुदायों के कई आवेदक अपने बुनियादी अधिकारों से जुड़ी जानकारी मांगते हैं और अक्सर कानूनी सहायता के बिना ही अपने मामलों की पैरवी करते हैं। पारदर्शिता के लिए काम करने वाले सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा ने को बताया कि एक जनवरी से 12 अक्टूबर, 2026 के बीच सीआईसी में लंबित मामलों की संख्या 9,378 बढ़ गई, जबकि आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त सहित सभी 11 आयुक्त पदस्थ थे। उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद चिंताजनक स्थिति है और केंद्रीय सूचना आयोग को इस पर ध्यान देना चाहिए तथा लंबित मामलों को कम करने के लिए देर तक काम करने जैसे कदम उठाने चाहिए।’’

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