चंद्रमा की सोलह कलाएं और अमृत वर्षा का आध्यात्मिक रहस्य-
शरद पूर्णिमा की रात का आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय रहस्यों से गहरा नाता है। इस रात्रि को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी के सबसे निकट होता है। आध्यात्मिक दृष्टि से जब चंद्रमा अपनी पूर्ण सोलह कलाओं में होता है, तो उसकी किरणें औषधीय गुणों और अमृततुल्य ऊर्जा से भर जाती हैं। शरद पूर्णिमा की रात को गौमाता के शुद्ध दूध से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे मिट्टी के पात्र में रखा जाता है। चंद्रमा की अमृतमयी किरणें जब इस खीर पर पड़ती हैं, तो यह साधारण भोजन न रहकर एक दिव्य औषधि बन जाती है। उक्त खीर का सेवन करने से शारीरिक व्याधियां और बीमारियां शांत होती हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इम्यूनिटी में वृद्धि होती है।
शरद पूर्णिमा के विशेष आध्यात्मिक उपाय-
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शरद पूर्णिमा के प्रदोष काल में जगतपालक भगवान श्रीविष्णु, माता लक्ष्मी और गौमाता का विधिवत पूजन कर गाय के दूध से बनी सफेद खीर अथवा मखाने की खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। रात्रि को कनकधारा स्तोत्र, श्री सूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना परम फलदाई माना गया है यह पाठ साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ भौतिक समृद्धि प्रदान करता है शरद पूर्णिमा भौतिक संपन्नता के साथ-साथ हमें अपनी आंतरिक चेतना और आत्मा को भी जाग्रत करना चाहिए। इस पावन रात्रि को अधिक से अधिक समय जप, ध्यान में व्यतीत करें,

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