- धनुष यज्ञ और रावण-बाणासुर संवाद का हुआ मंचन, कलाकारों ने जीवंत किया सीता स्वयंवर का प्रसंग
रामलीला में मिथिला नरेश राजा जनक के आमंत्रण पर महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के सीता स्वयंवर में पहुंचने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। श्रीराम और लक्ष्मण के आकर्षक स्वरूप को देखकर सभा में उपस्थित लोग मोहित हो गए। इसी बीच लंकापति रावण बिना आमंत्रण के स्वयंवर सभा में पहुंच गया। सभापति बाणासुर ने जब रावण से उसका परिचय पूछा, तो वह क्रोधित हो उठा। इसके बाद दोनों के बीच तीखा संवाद हुआ। रावण ने सीता स्वयंवर में आमंत्रित नहीं किए जाने पर राजा जनक के प्रति नाराजगी जताई और इसका कारण पूछा। इस पर जनक ने समुद्र पार लंका होने के कारण निमंत्रण नहीं भेज पाने की बात कही। रावण ने इस पर क्रोध व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समुद्र में एक पत्र भी डाल दिया जाता, तो समुद्र में इतना साहस नहीं था कि वह पत्र उस तक नहीं पहुंचाता। रावण और बाणासुर के बीच हुए संवाद को कलाकारों ने प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
सीता स्वयंवर में पहुंचे अनेक राजाओं ने शिवधनुष उठाने और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं सका। अंत में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आगे बढ़े। उन्होंने सहजता से शिवधनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष खंडित हो गया। धनुष टूटने के साथ ही पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इस दृश्य ने रामलीला देखने पहुंचे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह भर दिया। रामलीला के महंत बृजेश शर्मा ने बताया कि क्षेत्रवासियों के सहयोग से मंदिर परिसर में रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन रात्रि में कलाकार भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी विभिन्न लीलाओं का मंचन कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से रामलीला में पहुंचकर भगवान श्रीराम की लीलाओं का दर्शन करने और आयोजन का लाभ लेने की अपील की।

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