पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले कई महीनों से 12 विवादित शरणार्थी सीट को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनके खिलाफ सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा की कानूनी मामलों से संबंधित छठी समिति में ओआईसी की ओर से सऊदी अरब ने यह बयान दिया था। ओआईसी ने ‘‘दक्षिण एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने’’ और ‘‘पाकिस्तान में कई स्थानों पर किए गए अनुचित हमलों’’ का उल्लेख किया लेकिन उसने भारत का नाम नहीं लिया। भारत ने पिछले साल मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू कर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया था। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को हुए जघन्य आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी जिसमें 26 आम नागरिक मारे गए थे। यह हमला ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने किया था, जो पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन है। ओआईसी के बयान में जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया। देब ने कहा कि भारत अपने ‘‘कड़वे अनुभव’’ से इस बात को समझता है कि आतंकवाद का खतरा केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि ‘‘लगातार और रोजमर्रा की वास्तविकता’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लोग सीमा पार आतंकवाद का दशकों से सामना कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पहलगाम आतंकवादी हमला हमारी संप्रभुता पर सोची-समझी चोट था। इसकी योजना बनाने और इसे अंजाम देने का काम उन नेटवर्क ने किया जिन्हें हमारी पश्चिमी सीमा के पार से अब भी सरकारी संरक्षण, सुरक्षित ठिकाने और सामग्री एवं साजो-सामान संबंधी सहायता मिलती है।’’ देब ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद का हर रूप मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और इसका अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, आर्थिक प्रगति, लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा मानवाधिकारों पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हर मनुष्य के सबसे बुनियादी मानवाधिकार-जीवन के अधिकार- पर हमला करता है। आतंकवाद संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों के विपरीत है। आम नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाए जाने को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। अच्छे और बुरे आतंकवाद के बीच कोई फर्क नहीं है।’’ देब ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस टिप्पणी का उल्लेख किया कि भारत के लिए आतंकवाद की एक घटना भी अस्वीकार्य है और इसमें एक व्यक्ति की जान जाना भी बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवादी हमलों को मानवता पर हमला मानता है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन भर्ती करने, कट्टरपंथ फैलाने, दुष्प्रचार करने, हमलों की योजना बनाने और आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। देब ने कहा, ‘‘इन प्रौद्योगिकियों के जरिए पहचान छिपाना आसान होता है और इनकी वैश्विक पहुंच तथा तेज गति आतंकवादियों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बच निकलने और कमजोर युवाओं को निशाना बनाने में मदद करती है।’’ भारत ने वैश्विक आतंकवाद-रोधी प्रयासों में एक ‘‘प्रमुख कमी’’ की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि 1996 में भारत द्वारा मसौदा पेश किए जाने के बावजूद 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन' (सीसीआईटी) अब तक अस्तित्व में नहीं आया है। देब ने कहा, ‘‘भारत दोहराता है कि सीसीआईटी को शीघ्र अंतिम रूप दिए जाने से आतंकवाद का व्यापक रूप से मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा मजबूत होगा।’’

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