मधुबनी : राष्ट्रीय प्रदर्शनी में दिखेगी मिथिला चित्रकला संस्थान के छात्रों की सामूहिक कलाकृत्ति - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

मधुबनी : राष्ट्रीय प्रदर्शनी में दिखेगी मिथिला चित्रकला संस्थान के छात्रों की सामूहिक कलाकृत्ति

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मधुबनी, 08 अक्टूबर (रजनीश के झा) । संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली द्वारा 13 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शनी “राम और रामायण - देश से परदेश तक”  में मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी के कलाकारों द्वारा निर्मित सामूहिक कलाकृत्ति का प्रदर्शन अयोध्या में  किया जाएगा है। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के अधीन मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी के त्रि-वर्षीय कोर्स (सत्र 2024-27) के नौ छात्र-छात्राओं को संस्थान स्तर से इस सामूहिक कलाकृति के निर्माण हेतु चयनित किया गया है। इस पूरी कलात्मक परियोजना का निर्देशन श्री प्रतीक प्रभाकर, कनीय आचार्य द्वारा किया गया एवं सभी प्रतिष्ठित आचार्यों पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, डा0 रानी झा एवं श्री संजय कु0 जायसवाल के द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया गया है। 13 फीट × 5.5 फीट आकार के कैनवास पर ऐक्रेलिक रंगों एवं ब्रश के माध्यम से निर्मित इस कलाकृति में मधुबनी चित्रकला की दो प्रमुख शैलियों कचनी एवं भरनी का प्रयोग किया गया है। यह कलाकृत्ति महाराज दशरथ के पुत्रकामेष्टि यज्ञ एवं चारों राजकुमारों के जन्म से आरंभ होकर रामायण के प्रमुख प्रसंगों को क्रमबद्ध रूप में दर्शाया गया है। इस कलाकृति को सत्र 2024-27 के विद्यार्थी विक्की कुमार, राजू कुमार, दीपक कुमार, अंजली कुमारी मंडल, मेधा झा, ज्योति कुमारी झा, मुनकी कुमारी, सुरभी कुमारी एवं बिंदी कुमारी के द्वारा 9 दिनों के अथक मेहनत से तैयार गया है। यह कलाकृत्ति गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस पर आधारित है, जिसमें रामायण के 21 प्रमुख प्रसंगों को मधुबनी चित्रकला की पारंपरिक शैली में क्रमबद्ध रूप से चित्रित किया गया है।


संस्थान के निदेशक, श्री चंद्रशेखर प्रसाद सिंह के द्वारा सभी छात्रों बधाई प्रेषित कर कहा कि यह पहल मिथिला चित्रकला संस्थान की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जिसके अंतर्गत मिथिला की पारंपरिक कला-विरासत का संरक्षण, संवर्धन एवं नई पीढ़ी तक हस्तांतरण किया जा रहा है। रामायण जैसे कालजयी महाकाव्य को मधुबनी चित्रकला की पारंपरिक रेखाओं, रंगों एवं रूपांकनों के माध्यम से प्रस्तुत करना भारतीय महाकाव्य परंपरा और जीवंत लोककला के बीच एक सार्थक सांस्कृतिक सेतु का निर्माण किया जा रहा है। उप-निदेशक श्री नीतीश कुमार ने कहा अयोध्या में प्रस्तावित इस कलाकृति का प्रदर्शन संस्थान के युवा कलाकारों की सृजनात्मक क्षमता को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के साथ-साथ मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठित करने का अवसर होगा। संस्थान के निदेशक, उप-निदेशक, आचार्यो, लेखा पदाधिकारी,  श्री सुरेन्‍द्र प्रसाद यादव,  सहायक श्रीमती रूपा, श्री विकास कुमार मंडल, डाटा ऑपरेटर श्री अर्जुण कु०, मो० अरमान,  मो० सरफराज, श्री नीतीश कु०, श्री विकास कु० एवं श्री अभिषेक कुमार ने इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में संस्थान का अलग से कलाकृति प्रदर्शन हेतु चयन को लेकर हर्ष जताया|

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