दिल्ली : CJP नेताओं की रिहाई में देरी, चार जमानतदारों की गारंटी खारिज किेये जाने का आरोप - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 18 अक्टूबर 2026

दिल्ली : CJP नेताओं की रिहाई में देरी, चार जमानतदारों की गारंटी खारिज किेये जाने का आरोप

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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत पर सुनवाई में देरी हुई, क्योंकि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) तय समय पर नहीं पहुंच सके। कार्यकर्ता रत्ना सिंह ने रविवार को यह आरोप लगाते हुए कहा कि चार जमानतदारों की गारंटी भी अस्पष्ट कारणों से खारिज कर दी गयी। दास और रांका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। दोनों ने जंतर-मंतर के बंद फाटकों को फांदकर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया था। इस स्थल को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों की अधिसूचित सूची से हटा दिया गया है। कॉजपा नेताओं ने कहा था कि उन्होंने वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराये और नारे लगाए थे। रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह सुबह 11 बजे से थाने में मौजूद थीं, जबकि सुनवाई दोपहर 12 बजे निर्धारित थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शाम चार बजकर 42 मिनट तक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी/एसईएम) मंदिर मार्ग थाने नहीं पहुंचे थे। उन्होंने कहा, “यह वास्तव में चिंताजनक है। अब तक चार जमानतदारों की गारंटी को अस्पष्ट कारणों से खारिज कर दिया गया है। विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है, उन्हें आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया जा रहा है।” इन आरोपों पर पुलिस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सिंह ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध नहीं है और प्रक्रियागत देरी के कारण लड़कों को हिरासत में नहीं रहना चाहिए।” राष्ट्रीय राजधानी में एसईएम अदालतों के कामकाज पर सवाल उठाते हुए सिंह ने कहा कि उच्च अदालतों ने अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया और पदानुक्रम का पालन करने को कहा है। उन्होंने इस मामले में “सत्ता के पूर्ण दुरुपयोग” का भी आरोप लगाया। कॉजपा ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था कि उसने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सलाह ली है। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि दास और रांका को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वह कानूनी कार्रवाई करेगा। संगठन ने कहा था, “अगर आशु (आशुतोष रांका) और सौरव (दास) को कल तक रिहा नहीं किया गया, तो हम उन सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे, जिन्होंने जानबूझकर उन्हें अवैध हिरासत में रखवाना सुनिश्चित किया, खासकर तब, जब उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और न ही उन पर किसी अपराध का आरोप लगाया गया है।” उसने कहा, “उन्हें जेल में रखने के लिए जानबूझकर देरी करने की रणनीति अपनाने को चुनौती दिए बिना नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।” यह संगठन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में प्रदर्शन कर रहा है। संगठन का आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकारों को खतरा है।

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