उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने 10 से 12 जुलाई, 2026 के दौरान बेलगाम में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था, जिसका ‘‘एकमात्र एजेंडा जनगणना 2027’’ था। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई, 2026 को गठित जनसांख्यिकीय बदलाव संबंधी उच्चस्तरीय समिति ने हाल में देश में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को लेकर आम लोगों के साथ भारतीय और विदेशी संगठनों से सुझाव मांगे हैं। रमेश ने समिति पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इसके सदस्यों का संबंध ‘‘आरएसएस के तंत्र’’ से है और इसलिए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि समिति को किस तरह के सुझाव मिलेंगे। उन्होंने कहा कि 16 अक्टूबर, 2026 की जनगणना अधिसूचना को आरएसएस के 10-12 जुलाई के प्रशिक्षण शिविर और जनसांख्यिकीय बदलाव संबंधी समिति द्वारा 14 अक्टूबर को सुझाव मांगे जाने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। रमेश ने आरोप लगाया कि यह आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हजारों कार्यकर्ताओं के लिए ‘‘रोजगार गारंटी योजना’’ है तथा इससे पहले ही ‘‘कमजोर की जा चुकी’’ जनगणना की विश्वसनीयता और प्रभावित होगी। उन्होंने दावा किया, ‘‘एक और संस्था को नष्ट किया जा रहा है। एसआईआर की तरह जनगणना को भी खतरनाक तरीके से प्रभावित किया जाएगा। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की साजिशों की कोई सीमा नहीं है।’’
नई दिल्ली। कांग्रेस ने जनगणना-2027 के लिए प्रगणकों की पात्रता का दायरा बढ़ाए जाने को लेकर शनिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तरह जनगणना भी ‘‘खतरनाक तरीके से प्रभावित’’ की जाएगी तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ‘‘साजिशों की कोई सीमा नहीं है।’’ पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि केंद्र की सरकार ने जनगणना 2027 के लिए पात्र प्रगणकों की सूची का विस्तार किया है और इसके पीछे ‘‘बहुत कुटिल मंशा’’ है।

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