- पांच दिन तक मिलेगा प्रसाद, अन्नकूट पर लड्डुओं से बने शिवालय में विराजेंगे बाबा
वाराणसी (सुरेश गांधी)। काशी में धनतेरस का पर्व इस बार मां अन्नपूर्णा के खजाने और बाबा विश्वनाथ के छप्पन भोग की दिव्य परंपरा के नाम रहेगा। धन-धान्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री मां अन्नपूर्णा के दरबार में छह नवंबर की भोर चार बजे विशेष पूजा-अर्चना, भव्य शृंगार और महाआरती होगी। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मां के दर्शन और उनके पावन प्रसाद ‘खजाना’ वितरण की शुरुआत होगी। यह सिलसिला दस नवंबर को अन्नकूट महापर्व की शयन आरती तक जारी रहेगा। श्री काशी विश्वनाथ धाम में धनतेरस से अन्नकूट तक पांच दिनों तक भक्ति और परंपरा का विशेष उत्सव सजेगा। अन्नपूर्णा मंदिर में मां के दर्शन के साथ खजाना प्रसाद पाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। काशी की धार्मिक मान्यता में मां अन्नपूर्णा का खजाना केवल प्रसाद नहीं, बल्कि अन्न, धन-धान्य और अक्षय समृद्धि के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
बाबा को अर्पित होंगे 56 तरह के पकवान
अन्नकूट महापर्व पर दस नवंबर को मध्याह्न भोग आरती के दौरान भगवान विश्वेश्वर को छप्पन भोग अर्पित किए जाएंगे। इसमें तरह-तरह के मिष्ठान्न, फल, नमकीन, मेवे और पारंपरिक पकवान शामिल होंगे। इस अवसर पर भगवान विश्वनाथ के शिव परिवार की चल प्रतिमा गर्भगृह में विराजमान कर विशेष शृंगार किया जाएगा।
लड्डुओं से बनेगा भव्य शिवालय
अन्नकूट का एक और खास आकर्षण लड्डुओं से निर्मित भव्य शिवालय होगा। इसका निर्माण गर्भगृह के पश्चिमी द्वार के समीप स्थित श्री वैकुंठ महादेव प्रांगण में किया जाएगा। श्रद्धालु यहां लड्डुओं से बने शिवालय के दर्शन कर सकेंगे। मध्याह्न भोग आरती के बाद शिव परिवार की चल प्रतिमा के दर्शन भी गर्भगृह के बाहर से झांकी स्वरूप होंगे।
दक्षिणी द्वार से होगी शयन आरती
अन्नकूट के दिन शाम छह बजे के बाद नियमित आरतियां निर्धारित समय पर होंगी। हालांकि, इस दिन शयन आरती की व्यवस्था में बदलाव रहेगा। सामान्य दिनों में गर्भगृह के पश्चिमी द्वार से होने वाली शयन आरती इस बार दक्षिणी द्वार से संपन्न की जाएगी। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम करने की बात कही है।

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